मध्य प्रदेश में लचर शिक्षा व्यवस्था और स्कूलों की बदहाली के खिलाफ अब 'जेन अल्फा' (नई पीढ़ी के छात्र) का गुस्सा फूट पड़ा है। सोशल मीडिया की आभासी दुनिया को छोड़कर अब ये छात्र अपने हकों के लिए सीधे सड़कों पर उतर रहे हैं।
सोमवार को प्रदेश के सागर और बड़वानी जिलों में छात्रों के भारी विरोध प्रदर्शन के आगे प्रशासन को घुटने टेकने पड़े। छात्रों की एकजुटता का असर यह हुआ कि कहीं दो घंटे में स्कूल का अतिक्रमण ढहा दिया गया, तो कहीं 15 किलोमीटर पैदल मार्च कर रही छात्राओं को मनाने के लिए खुद जिले की कलेक्टर को सड़क पर आना पड़ा।
स्टेट हाईवे पर चक्काजाम, दो घंटे में जेसीबी से ढहाया अतिक्रमण
- सागर जिले के देवरीकलां स्थित रसेना शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल के छात्र-छात्राओं ने स्कूल भवन की कमी और पेयजल संकट को लेकर महाराजपुर-सहजपुर स्टेट हाईवे पूरी तरह जाम कर दिया। कक्षा 9वीं से 12वीं तक के इन छात्रों का आरोप था कि उनका स्कूल फिलहाल खाद्य विभाग के एक गोदाम में संचालित हो रहा है, जहां बैठने तक की जगह नहीं है। इसके अलावा, स्कूल के हैंडपंप पर अवैध कब्जा कर लिया गया है, जिससे पीने के पानी की भारी किल्लत है।
- छात्र पिछले दो साल से अपनी गुहार लगा रहे थे, लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने चक्काजाम का रास्ता चुना। हंगामे की खबर मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने स्थिति की गंभीरता को समझा और महज दो घंटे के भीतर जेसीबी मशीन बुलाकर अतिक्रमण हटवा दिया। कार्रवाई का विरोध कर रही कुछ महिलाओं को पुलिस ने हिरासत में भी लिया, जिसके बाद मामला शांत हुआ।
आदिवासी कीड़े हैं' जैसे तानों से भड़कीं छात्राएं
- बड़वानी जिले के सेंधवा (जामली) स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय की 150 से अधिक छात्राएं स्कूल प्रबंधन के दुर्व्यवहार, जातिगत प्रताड़ना और हॉस्टल की बदहाल व्यवस्थाओं के खिलाफ बगावत पर उतर आईं। छात्राओं का गंभीर आरोप है कि स्कूल का स्टाफ उनके साथ अमानवीय व्यवहार करता है। उन्हें 'आदिवासी कीड़े, अनपढ़ और गंवार' कहकर अपमानित किया जाता है। स्टाफ यहां तक ताना मारता है कि "तुम लोग पढ़कर क्या करोगी, 10वीं-12वीं के बाद शादी करके बच्चे ही तो पैदा करने हैं।"
- हॉस्टल में कैदियों जैसी जिंदगी जीने को मजबूर इन छात्राओं के सब्र का बांध जब टूट गया, तो वे कलेक्ट्रेट जाने के लिए 15 किलोमीटर पैदल मार्च करते हुए सड़क पर निकल पड़ीं। छात्राओं के इस रौद्र रूप को देखकर पुलिस-प्रशासन के हाथ-पैर फूल गए। स्थिति बिगड़ती देख बड़वानी कलेक्टर जयति सिंह को खुद जुलवानिया पहुंचना पड़ा। जब कलेक्टर ने छात्राओं से बात कर तत्काल एक जांच समिति गठित करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया, तब जाकर छात्राएं शांत हुईं। बाद में प्रशासन ने बसों की व्यवस्था कर उन्हें वापस स्कूल भिजवाया।