मध्य प्रदेश में लंबे समय से चले आ रहे 'प्रमोशन में आरक्षण' के विवाद पर जल्द ही कोई बड़ा फैसला आ सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़े सभी केसों पर अगले तीन महीने के भीतर सुनवाई करने का निर्णय लिया है। इसके लिए जल्द ही एक विशेष उचित पीठ (बेंच) का गठन किया जाएगा।
शीर्ष अदालत के इस अहम आदेश के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट अपना अंतिम फैसला नहीं सुना देता, तब तक जबलपुर हाईकोर्ट इस विवाद पर कोई भी आदेश जारी नहीं कर सकेगा।
त्वरित सुनवाई की याचिकाओं पर आया फैसला
- प्रमोशन में आरक्षण के मसले पर जल्द सुनवाई के लिए कई कर्मचारी संगठनों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अर्जियां लगाई गई थीं। इन आवेदनों पर विचार करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉय माल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है।
- बता दें कि इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर मध्य प्रदेश सरकार की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट में 6 अलग-अलग सिविल अपील और स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) लंबित हैं, जिनमें कई कर्मचारी संगठन प्रतिवादी (रेस्पोंडेंट) हैं।
सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी निगाहें
- अधिवक्ता रामेश्वर ठाकुर के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के इस हालिया आदेश का सीधा असर जबलपुर हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई पर पड़ेगा, जो अब पूरी तरह रुक जाएगी। इसका मतलब है कि यह विवाद अभी और लंबा खिंच सकता है, क्योंकि अब इस मामले में अंतिम और सर्वमान्य फैसला सुप्रीम कोर्ट ही करेगा।
- गौरतलब है कि साल 2011 से 2026 के बीच देशभर में प्रमोशन में आरक्षण से जुड़े जितने भी कानूनी विवाद सामने आए हैं, उन सभी को सुप्रीम कोर्ट ने 'जनरैल सिंह एवं अन्य बनाम लक्ष्मीनारायण गुप्ता' केस के साथ संलग्न (क्लब) कर दिया है।