नई दिल्ली: गौरव मौर्य उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के रहने वाले हैं। खेती में एक नया प्रयोग करके उन्होंने सफलता की अनूठी मिसाल पेश की है। वह कृषि में ग्रेजुएट हैं। सब्जियों की ग्राफ्टिंग तकनीक को गौरव ने बेहद फायदेमंद नर्सरी बिजनेस में तब्दील कर दिया है। छोटे स्तर पर बैंगन की ग्राफ्टिंग के प्रयोग से शुरू हुआ उनका यह सफर आज 60 लाख रुपये के सालाना टर्नओवर तक पहुंच चुका है। आइए, यहां गौरव मौर्य की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।गौरव मौर्य ने एग्रीकल्चर में BSc की है। साल 2023 की बात है। अपने पारिवारिक खेत में उन्होंने एक ट्रायल किया। इसके लिए खेत के बहुत छोटे हिस्से का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने हाइब्रिड बैंगन को 'सोलेनम टॉरवम' नाम के रूटस्टॉक पर ग्राफ्ट करके उगाने का परीक्षण किया। जुलाई 2023 से मार्च 2024 तक चली इस फसल से उन्हें लगभग 112 क्विंटल बैंगन की पैदावार मिली। इससे 2.27 लाख का शुद्ध लाभ हुआ। इस तकनीक ने फसलों को बैक्टीरिया जनित विल्ट और रूट-नॉट नेमाटोड जैसी बीमारियों से बचाया। इससे फल देने की अवधि सामान्य 3-4 महीनों से बढ़कर 10 महीने से अधिक हो गई।
अपने ट्रायल की सफलता के बाद गौरव ने समझा कि इस तकनीक का फायदा अन्य किसानों तक भी पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने अपनी कृषि इनपुट दुकान और ऑनलाइन अध्ययनों से मिले अनुभव का इस्तेमाल कर ग्राफ्टेड पौध तैयार करने का बिजनेस शुरू किया। अगले ही साल उन्होंने लगभग 75,000 ग्राफ्टेड टमाटर और बैंगन के पौधे बेचे। इससे उन्हें 3.37 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। अपने पौधों को बेचने और किसानों तक पहुंच बनाने के लिए उन्होंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया। इससे सोनभद्र, चंदौली, मिर्जापुर, प्रयागराज, गाजीपुर, गोरखपुर और आजमगढ़ के किसान उनसे जुड़ गए।
गौरव की नर्सरी में बैंगन, टमाटर और मिर्च के ग्राफ्टेड पौधे तैयार किए जाते हैं। इसमें बुआई से लेकर बिक्री तक 50 से 60 दिनों का समय लगता है। ग्राफ्टिंग के बाद पौधों को 7 दिनों तक कंट्रोल्ड टेम्परेचर, कम रोशनी और बहुत ज्यादा ह्यूमिडिटी वाले 'हीलिंग चैंबर' में रखा जाता है। एक पौधा तैयार करने में लगभग 8 से 10 रुपये की लागत आती है। इसे वैरायटी के अनुसार 12 से 13 रुपये में बेचा जाता है। उनकी नर्सरी में पौधों के जीवित रहने की दर यानी सर्वाइवल रेट लगभग 90% है। वह किसानों के एडवांस ऑर्डर के आधार पर उत्पादन की प्लानिंग करते हैं।
560 वर्ग फीट से 60 लाख का टर्नओवर
आज गौरव 560 वर्ग फीट में फैली नर्सरी से उत्तर प्रदेश और पड़ोसी राज्यों के हजारों किसानों को ग्राफ्टेड पौधे सप्लाई कर रहे हैं। पिछले साल उन्होंने लगभग 4 लाख पौधे बेचकर 60 लाख रुपये का टर्नओवर और 16 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया। वह खुद भी 4 एकड़ जमीन पर फूलगोभी, धनिया, हरी मिर्च, पपीता और ग्राफ्टेड बैंगन की खेती करते हैं। साल 2026 में 6 लाख पौधे बेचने के टारगेट के साथ गौरव का इरादा 2027 तक अपने वार्षिक उत्पादन को 20 लाख पौधों तक ले जाने का है।