नई दिल्ली: फेस्टिव सीजन जारी है। इस बीच कई लोग ऐसे हैं, जो दिवाली तक अपने नए घर या फ्लैट में शिफ्ट होने की प्लान कर रहे हैं। समय के साथ प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतों के बीच लोगों को होम लोन की तलाश होती है। इसके लिए वे कई बैंकों की लिस्ट देखते हैं और यह मालूम करते हैं कि किस बैंक में कितना सस्ता होम लोन मिल रहा है। इसके लिए वे बैंकों की ब्याज दर समेत अन्य जरूरी चीजों को देखते हैं।हालांकि, केवल सस्ता लोन ही सही लोन नहीं होता। आपको होम लोन लेने के लिए और भी कई बातों का ध्यान रखना होता है। हम यहां 4 ऐसी बातें बता रहे हैं, जो आपको होम लोन लेने से पहले कुछ मदद कर सकती हैं। आइए इन्हें जानते हैं।होम लोन लेने से पहले किन बातों का ध्यान रखें?
जब भी आप होम लोन लेने की सोचते हैं तो सबसे पहले यह प्लान करते हैं कि आप सही होम लोन देने वाले (लेंडर) को कैसे चुनें? आइए जानते हैं कि होम लोन और लेंडर को चुनते समय किन बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।लोन की राशि: सबसे पहले हम बात लोन की राशि यानी कि पैसे की करते हैं। सभी बैंक ग्राहक की इनकम के हिसाब से एक जैसी लोन की राशि नहीं देते हैं। लोन के लिए पात्रता तय करने के लिए अलग-अलग बैंकों के अपने अलग-अलग पैमाने और नियम होते हैं। लाजिमी सी बात है कि आप उस लेंडर को चुनना चाहेंगे जो आपकी जरूरत के हिसाब से लोन की राशि दे सके।ब्याज दर: किसी भी प्रकार के लोन के लिए ब्याज दर काफी मायने रखती है। अगर ब्याज दर अधिक होती है तो आपको हर महीने ज्यादा EMI देनी पड़ जाती है। इसलिए बाजार में मौजूद सबसे अच्छी ब्याज दरों का पता जरूर करें। कम ब्याज दर से आपको कम ईएमआई देनी पड़ती है।
अगर आपने फ्लोटिंग रेट पर लोन लिया है, तो आपको यह भी ध्यान रखना चाहिए कि समय-समय पर ब्याज दरों में बदलाव हो सकता है, जिसका असर आपकी EMI पर पड़ेगा। ब्याज दरों में थोड़ी सी बढ़ोतरी का मतलब है कि आपको हर महीने कुछ सौ या हजार रुपये ज्यादा चुकाने पड़ सकते हैं। यह भी पता करें कि जब बाजार में ब्याज दरें कम होती हैं, तो लेंडर उसका फायदा ग्राहकों को कितनी बार देता है।
फीस और पेनल्टी: कुछ लेंडर या बैंक कम ब्याज दर का लालच दे सकते हैं, लेकिन उनकी शर्तें और फीस अधिक हो सकती हैं। इस दौरान लोन लेने से पहले आपको एप्लीकेशन फीस, प्रोसेसिंग फीस, स्विचिंग चार्ज, लीगल चार्ज, प्रॉपर्टी वैल्यूएशन चार्ज और प्रीपेमेंट पेनल्टी जैसी जरूरी चीजों को जांच लेनी चाहिए।
कस्टमर सर्विस: अब आखिरी में बात कस्टमर सर्विस की। लोन लेने वाले और बैंक के बीच का रिश्ता 10 से 15 साल तक चलता है। इसलिए, यह बहुत जरूरी है कि लेंडर अच्छी कस्टमर सर्विस दे और अपने ग्राहकों को पूरी तरह संतुष्ट रखे। इसलिए आप किसी भी बैंक से होम लोन लेने से पहले यह जांच कर लें कि उसकी कस्टमर सर्विस कैसी है।
- होम लोन लेने से पहले किन बातों का ध्यान रखें?
होम लोन लेने से पहले बैंक, ब्याज दर, फीस और कस्टमर सर्विस समेत अन्य बातों को ध्यान में रखें। - होम लोन पर ब्याज दर बढ़ती है तो क्या होता है?
होम लोन पर ब्याज दर बढ़ती है तो लोन की ईएमआई बढ़ सकती है। - फ्लोटिंग रेट कब चुन सकते हैं?
जब आपको लगे कि ब्याज दरों में गिरावट हो सकती है तो आप फ्लोटिंग रेट चुन सकते हैं। - फिक्स्ड लोन रेट कब चुनना चाहिए?
जब आपको लगे कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो सकती है तो आपको फिक्स्ड लोन रेट चुनना चाहिए। - रेपो रेट क्या होता है?
रेपो रेट वह ब्याज दर होता है, जिसके आधार पर भारतीय रिजर्व बैंक देश के कमर्शियल बैंकों को लोन देता है।