
वनतारा के खिलाफ ये याचिका करणार्थम विरम नाम की एक फाउंडेशन ने दायर की थी। याचिका में केंद्र सरकार, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण और अन्य को निर्देश देने की मांग की गई थी। इसमें वनतारा पर जानवरों से संबंधित कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था।
कोर्ट ने पिछले साल इसी तरह की एक PIL खारिज कर दी थी। अदालत ने जस्टिस जे. चेलमेश्वर की अध्यक्षता वाली अपनी विशेष जांच टीम (SIT) की वनतारा को दी गई क्लीन चिट को स्वीकार कर लिया था। फाउंडेशन की याचिका पर जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने SIT की रिपोर्ट को सही ठहराया।
कोर्ट ने ये भी कहा…
यह मुद्दा नया नहीं है। इससे जुड़ी एक याचिका पहले भी दायर हो चुकी थी, जिस पर कोर्ट पहले ही विचार कर चुका है।
15 सितंबर 2025 को कोर्ट ने SIT की अंतिम रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया था। याचिकाकर्ता ने जिस अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज (CITES) का हवाला दिया, वह उसके पक्ष में नहीं था।
CITES के अनुसार, जानवरों का आयात जरूरी परमिट और दस्तावेजों के साथ किया गया था, और यह व्यापार के लिए नहीं था।
अगर जानवरों का आयात पहले सही तरीके से हुआ है, तो बाद में आपत्ति उठाने से वह अवैध नहीं बन जाता।
करणार्थम विरम फाउंडेशन की याचिका में 4 मांगें थीं…
केंद्र सरकार और संबंधित संस्थाएं वनतारा और उसके हाथी ट्रस्ट को 2019 से अब तक दी गई सभी अनुमति, मान्यता और लाइसेंस का पूरा रिकॉर्ड कोर्ट में पेश करें।
खास तौर पर जानवरों के आयात और निर्यात से जुड़े सभी लाइसेंस और परमिट की जानकारी दी जाए।''
एक नई स्वतंत्र राष्ट्रीय समिति बनाई जाए, जो वन्यजीव व्यापार की निगरानी करे। इस समिति का नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर्ड जज करें।
समिति में वन्यजीव, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और पर्यावरण कानून के विशेषज्ञ भी शामिल हों। यह समिति सभी आयात, निर्यात और पुनः निर्यात परमिट (CITES से जुड़े) की वैधता और असली होने की जांच करे।
SIT ने 12 सितंबर 2025 को रिपोर्ट सौंपी थी
4 सदस्यीय SIT का नेतृत्व पूर्व जज जस्टिस जे. चेलमेश्वर ने किया था और टीम में जस्टिस राघवेंद्र चौहान (पूर्व चीफ जस्टिस, उत्तराखंड व तेलंगाना HC), पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर हेमंत नागराले और कस्टम्स अधिकारी अनिश गुप्ता शामिल थे।
SIT ने 12 सितंबर को रिपोर्ट सौंप दी थी। कोर्ट ने SIT की सराहना की और कहा कि समिति को मानदेय भी दिया जाए।
SIT ने 5 पॉइंट्स पर जांच की
भारत और विदेश से, विशेषकर हाथियों के अधिग्रहण में- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, चिड़ियाघरों के नियम, अंतरराष्ट्रीय प्रजाति व्यापार संधि (CITES), आयात-निर्यात कानूनों और अन्य वैधानिक आवश्यकताओं का पालन हुआ या नहीं।
पशुपालन मानकों, पशु-चिकित्सा देखभाल, पशु कल्याण, मृत्यु दर और उनके कारणों, जलवायु और स्थान संबंधी शिकायतों की।
निजी संग्रह बनाने के आरोपों, प्रजनन और संरक्षण कार्यक्रमों, जैव विविधता संसाधनों के उपयोग, कानूनी उल्लंघनों, वन्यजीव तस्करी और पशु उत्पादों के व्यापार आदि मामले में।'
वित्तीय अनुपालन, मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य संबंधित मुद्दों की शिकायतों की।
इसके अलावा जरूरत के मुताबिक, याचिकाकर्ताओं, अधिकारियों, नियामकों, हस्तक्षेपकर्ताओं और पत्रकारों से भी जानकारी ली।
हथिनी माधुरी की शिफ्टिंग के बाद विवाद
16 जुलाई को बॉम्बे हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि हथिनी माधुरी को वनतारा में शिफ्ट किया जाए। यह आदेश PETA इंडिया की ओर से हथिनी की सेहत, गठिया और मानसिक तनाव को लेकर जताई गई चिंताओं के बाद दिया गया था।
इससे पहले दिसंबर 2024 में, बॉम्बे हाईकोर्ट ने हथिनी के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए उसे गुजरात के वनतारा पशु अभयारण्य में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था। फिर 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने भी इस आदेश को बरकरार रखा था। यह मामला 2023 से चल रहा है।
माधुरी को वनतारा शिफ्ट किए जाने पर कोल्हापुर में जुलाई के आखिरी हफ्ते में विरोध प्रदर्शन हुए। लोगों ने उसको वापस लाने के लिए हस्ताक्षर किए। धार्मिक परंपराओं और भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया।
14 अगस्त: कोर्ट ने याचिका में वनतारा को पक्षकार बनाने को कहा
माधुरी को वापस लाने वाली याचिका पर पहली सुनवाई 14 अगस्त को हुई थी। इस दौरान जस्टिस पंकज मित्तल और पीबी वराले की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील सीआर जया सुकीन से कहा था कि वह वनतारा पर आरोप लगा रहे हैं। जबकि उसे याचिका में पक्षकार के रूप में शामिल ही नहीं किया गया है।
अदालत ने उन्हें वनतारा को पक्षकार बनाने और फिर मामले में लौटने को कहा, साथ ही मामले की सुनवाई की तारीख 25 अगस्त तय की। इससे पहले CJI बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ 11 अगस्त को हथिनी को वनतारा भेजने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई को सहमत हुई थी।
जैन मठ में 32 साल से रह रही थी
कोल्हापुर के नांदणी गांव के जैन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी संस्थान मठ में माधुरी नाम की हथिनी को 1992 में लाया गया था। इस जैन मठ में 700 सालों से ये परंपरा है कि यहां हाथी पाला जाता है। यह धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है। यहां माधुरी हथिनी को तब लाया गया था, जब वह सिर्फ 4 साल की थी। वह यहां 32 सालों से रह रही थी।