नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश भर के सरकारी और निजी स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश दिया है कि वे एक बार इस्तेमाल होने वाले मेडिकल उपकरणों और सर्जिकल सामानों का दोबारा उपयोग करना पूरी तरह बंद कर दें। सरकार ने चेतावनी दी है कि ऐसा करने से मरीजों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है, खासकर क्रिटिकल केयर (गंभीर देखभाल) के मामलों में।DGHS ने कहा कि दोबारा इस्तेमाल करने से मरीजों को क्रॉस-इंफेक्शन, डिवाइस के खराब होने, उसकी कार्यक्षमता कम होने और अन्य जटिलताओं का खतरा हो सकता है। इसमें कहा गया है कि ऐसा करना 'ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940', 'मेडिकल डिवाइसेस रूल्स, 2017', 'क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स एक्ट, 2010' और संक्रमण नियंत्रण तथा बायोमेडिकल कचरा प्रबंधन से जुड़े लागू नियमों का उल्लंघन हो सकता है।भारत में किस तरह के सिंगल यूज उपकरण दोबारा इस्तेमाल किए जाते हैं
DGHS ने बताया कि CGHS ने नवंबर 2016 में इस मुद्दे पर एक ऑफिस मेमोरेंडम जारी किया था, जो इस योजना से जुड़े अस्पतालों के लिए था। भारत में जिन 'सिंगल-यूज' उपकरणों को दोबारा इस्तेमाल किए जाने की खबरें हैं, उनमें एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी में इस्तेमाल होने वाले कार्डियक कैथेटर और गाइडवायर, डायलिसिस के उपकरण, कुछ सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट, और डिस्पोजेबल सीरिंज व सुइयां शामिल हैं। इस तरह के काम से संक्रमण का खतरा बढ़ता है और मरीजों की सुरक्षा पर सवाल उठते हैं, खासकर तब जब मरीजों को इस बारे में बताया ही न जाए।मरीजों को गंभीर खतरा
इस निर्देश का स्वागत करते हुए, 'एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री' (AiMeD) ने कहा कि जो उपकरण सिर्फ एक बार इस्तेमाल के लिए बनाए और प्रमाणित किए गए हैं, उन्हें दोबारा इस्तेमाल करने से मरीजों को खतरा हो सकता है। इसके फोरम कोऑर्डिनेटर, राजीव नाथ ने कहा कि अगर कोई उपकरण निर्माता कंपनी के निर्देशों के खिलाफ जाकर दोबारा इस्तेमाल किया जाता है, तो इसके लिए किसकी जिम्मेदारी होगी, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।