भोपाल। मध्य प्रदेश में अभी तक एक चिकित्सा विश्वविद्यालय जबलपुर में था। इसके अंतर्गत ही पूरी चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था आती है लेकिन इसमें आ रही समस्या को देखते हुए सरकार ने इसके दो भाग करने का निर्णय लिया है। दूसरा चिकित्सा विश्वविद्यालय उज्जैन में खुलेगा। इसके लिए आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें क्षेत्र विभाजित करने का प्रविधान होगावहीं, दूसरा धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक 2026 लाया जाएगा, जिससे उज्जैन में विश्वविद्यालय स्थापित होगा और उसका क्षेत्राधिकार निर्धारित होगा। दोनों विधेयक को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में रविवार को भोपाल से लगे जगदीशपुर में हुई कैबिनेट की बैठक में स्वीकृत दी गई।
बढ़ेगा 10 करोड़ का अतिरिक्त भार
चिकित्सा शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए चिकित्सा विश्वविद्यालय को तीन हिस्से में बांटने का प्रस्ताव था। एक भाग जबलपुर, दूसरा भोपाल और तीसरा उज्जैन प्रस्तावित किया गया था लेकिन ग्वालियर से भी मांग उठ गई। इसे देखते हुए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने नए सिरे से प्रस्ताव तैयार करके विश्वविद्यालय को तीन के स्थान पर दो हिस्से (जबलपुर और उज्जैन) में बांटने का प्रस्ताव रखा। उज्जैन में भोपाल से लेकर पश्चिमी मध्य प्रदेश के सभी जिले आंएगे। इस विभाजन से प्रतिवर्ष करीब 10 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार आएगा।
फायर सेफ्टी और इमरजेंसी सेवाओं में संशाेधन
इसके साथ ही बैठक में मध्य प्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक, मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2026 (निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए भूमि, निर्मित क्षेत्र तथा विन्यास निधि के प्रावधान से छूट दिया जाना) का अनुमोदन दिया।
मध्य प्रदेश श्रम शक्ति संहिता, उद्योगों की सुगमता के लिए एक स्थान से सारी अनुमति देने सहित अन्य प्रविधानों के लिए ईज आफ डूइंग बिजनेस विधेयक के साथ राजमार्ग संशोधन विधेयक को स्वीकृति देकर संबंधित विभागों को कार्रवाई करने के लिए अधिकृत किया गया।
73 स्वास्थ्य संस्थाओं का होगा उन्नयन
कैबिनेट की पिछली बैठक में स्थगित रखे गए स्वास्थ्य सेवाओं के उन्नयन के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई। इसके लिए 776 करोड़ रुपये भी स्वीकृत किए गए। इसमें 29 उप स्वास्थ्य केंद्रों के छह बिस्तरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 19 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का 50 बिस्तरीय सिविल अस्पताल और सात संस्थाओं को 100 बिस्तरीय अस्पताल में उन्नयन को मंजूरी दी।
इनमें 1,600 नियमित एवं 71 संविदा के नवीन पदों के सृजित किए हैं। 560 व्यक्तियों को आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से रखा जाएगा।