
महाराष्ट्र से दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने जा रहे छात्रों को इटारसी में गोवा एक्सप्रेस से उतार लिया गया।
ये मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव से जुड़े मुद्दों पर दिल्ली में प्रदर्शन करने जा रहे थे। छात्रों का आरोप था कि पुलिस ने उन्हें जबरन ट्रेन से उतार कर रिसॉर्ट में नजरबंद किया। दो छात्रों ने पुलिस कार्रवाई के विरोध में भूख हड़ताल भी शुरू कर दी थी।
कांग्रेस नेताओं ने भी पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। कांग्रेस महासचिव राजकुमार केलू उपाध्याय ने दोनों छात्रों को जूस पिलाकर भूख हड़ताल खत्म कराई।
शुक्रवार रात 14 छात्रों को पुणे भेजा
शुक्रवार रात करीब 11 बजे 14 छात्रों को बस से पुणे के लिए रवाना किया गया। बस में चार पुलिसकर्मी भी साथ गए। छात्रों ने 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारे लगाए।
रिसोर्ट भाजपा नेता का बताया जा रहा
छात्रों को इटारसी के जिस निजी रिसॉर्ट में रखा गया था, उसके तीन पार्टनर होने की जानकारी सामने आई है। इनमें भाजपा नेता विश्वनाथ सिंघल के बेटे रौनक सिंघल, भाजपा कार्यकर्ता विपिन चांडक और एक अन्य व्यक्ति का नाम बताया जा रहा है।
हालांकि, रिसॉर्ट की साझेदारी से जुड़े दस्तावेजों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मामला हाईकोर्ट पहुंचा, 13 अक्टूबर को अगली सुनवाई
सीजेपी प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे महाराष्ट्र के छात्र-छात्राओं को ट्रेन से उतारकर हिरासत में लेने का मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट भी पहुंच गया है। मामले में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाएं दायर की गई हैं।
9 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य शासन को संबंधित व्यक्ति को कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने यह भी कहा कि शासन संबंधित व्यक्ति की परिवार तक सुरक्षित वापसी की व्यवस्था कर सकता है। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।
दिल्ली जा रहे छात्र-छात्राओं को ट्रेन से उतारने का आरोप
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महाराष्ट्र के पुणे से दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे छात्र-छात्राएं गोवा एक्सप्रेस से यात्रा कर रहे थे।
आरोप है कि इटारसी रेलवे स्टेशन पर उन्हें ट्रेन से उतारकर हिरासत में ले लिया गया। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध रोका गया। इसी कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाएं दायर की गईं।
शासन को संबंधित व्यक्ति को कोर्ट में पेश करना होगा
विषाखा प्रशांत लोंढे विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन एवं अन्य मामले की सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने राज्य शासन को संबंधित व्यक्ति को न्यायालय में पेश करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने यह विकल्प भी दिया कि शासन अगली सुनवाई से पहले दूसरे पक्ष को पूर्व सूचना देकर संबंधित व्यक्ति को न्यायालय में पेश कर सकता है। साथ ही, उसके परिवार तक सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की व्यवस्था करने की बात भी कही गई।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रकाश उपाध्याय ने अधिवक्ता शुभम मिश्रा और हेमंत गुप्ता के साथ पक्ष रखा। राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता बीडी सिंह और शासकीय अधिवक्ता आरडी परहा हाजिर हुए। मामले में नोटिस जारी किए गए हैं।
छात्रों के साथ दो मजदूर भी हिरासत में थे
छात्रों के साथ दो दिहाड़ी मजदूरों को भी हिरासत में लिया गया। मजदूरों का कहना है कि उनका प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं था और वे दिल्ली स्थित अपने घर लौट रहे थे।
सगे भाई विकास कुमार और परविंद कुमार पेंटिंग का काम करते हैं। वे ट्रेन से दिल्ली स्थित अपने घर लौट रहे थे। परविंद कुमार ने बताया, "हमें भी छात्रों के साथ जबरदस्ती उतार लिया गया। हमने पुलिस को बताने की कोशिश की कि हम मजदूर हैं और घर जा रहे हैं, लेकिन उन्होंने हमारी एक नहीं सुनी।"
भोपाल और ग्वालियर में भी कार्रवाई, सात अन्य छात्रों को हिरासत में लेने का दावा
कार्रवाई इटारसी तक सीमित नहीं रही। खबर के मुताबिक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से दिल्ली जा रहे 'कॉकरोच जनता पार्टी' से जुड़े सात अन्य छात्रों को भी मध्य प्रदेश के अलग-अलग स्टेशनों पर हिरासत में लिया गया। उनके नाम और स्टेशन इस प्रकार हैं:
पुलिस से सात सवाल, जवाब नहीं मिला
मामले पर नर्मदापुरम के एसपी और इटारसी थाना प्रभारी का जवाब नहीं मिला। दैनिक भास्कर ने एसपी को वॉट्सऐप पर सात सवाल भेजे..
दिल्ली पहुंचने वाली 8 ट्रेनें रद्द, यात्रियों को परेशानी
रेलवे बोर्ड के निर्देश पर 9 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे के बाद शुरुआती स्टेशनों से चलने वाली और 10 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच दिल्ली या हजरत निजामुद्दीन पहुंचने वाली कुछ ट्रेनें रद्द की गई हैं।
सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया के मुताबिक, यह व्यवस्था एक दिन के लिए है। यात्रियों की मदद के लिए स्टेशनों पर हेल्प डेस्क भी शुरू की गई हैं। अचानक ट्रेनें रद्द होने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।