कराची पहुंची पाकिस्तान की पहली हंगोर सबमरीन, पानी के अंदर ही नहीं गई, चीनी तकनीक की खुली पोल
Updated on
12-06-2026 12:38 PM
इस्लामाबाद: चीन में बनी पाकिस्तानी नेवी की पहली हंगोर क्लास सबमरीन गुरुवार 11 जून को कराची पहुंच गई। यह सबमरीन चीन से रवाना होकर मलेशिया, इंडोनेशिया, सुंडा जलडमरूमध्य के रास्ते श्रीलंका होते हुए पाकिस्तान पहुंची है। इसे 30 अप्रैल को चीन के हैनान आईलैंड पर पाकिस्तानी सेना में कमीशन किया गया था। गुरुवार को सबमरीन के पाकिस्तानी नेवी के बेड़े में शामिल होने पर राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने सभी को बधाई दी है।
जरदारी ने बताया मील का पत्थर
जरदारी ने इसे पाकिस्तान की समुद्री रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक अहम उपलब्धि बताते हुए चीन की सरकार और वहां के लोगों को उनके बहुमूल्य सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। जरदारी ने कहा कि हंगोर कार्यक्रम पाकिस्तान और चीन के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी को दिखाता है।
पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने इसे पाकिस्तान की समुद्री रक्षा को आधुनिक बनाने की दिशा में ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया। इस पनडुब्बी को चीन और पाकिस्तान के बीच हुए करार के तहत बनाया गया है। इसमें 8 एयर इंडिपेंडेंट प्रपल्शन (AIP) तकनीक वाली सबमरीन का निर्माण किया जाना है। इनमें 4 पनडुब्बियों को चीन और बाकी 4 को कराची शिपयॉर्ड में तैयार किया जाएगा।
चीनी सबमरीन पर उठे सवाल
हंगोर क्लास सबमरीन का अधिग्रहण कार्यक्रम पाकिस्तानी नेवी के इतिहास का सबसे बड़ा रक्षा अनुबंध है, जिसका अनुमानित बजट 4 से 5 अरब अमेरिकी डॉलर है। हालांकि, चीन में बनी यह सबमरीन अपने पहले सफर के बाद से ही सवालों के घेरे में है। सूत्रों के अनुसार, सबमरीन ने चीन से पाकिस्तान का सफर सतह पर रहते हुए ही पूरा किया है। सफर के दौरान हंगोर क्लास पनडुब्बी ने गोता नहीं लगाया है। इसके चलते कई सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सबमरीन पानी के अंदर क्यों नहीं जा रही है
पाकिस्तान ने क्यों रखा हंगोर क्लास नाम
पाकिस्तान की हंगोर क्लास सबमरीन चीन की Type 039B युवान क्लास सबमरीन का एक्सपोर्ट वर्जन है। हालांकि, इसका हंगोर क्लास नाम रखने की वजह 1971 का भारत पाकिस्तान युद्ध है। इस युद्ध के दौरान पाकिस्तान के PNS हंगोर ने भारतीय नौसेना के युद्धपोत INS खुखरी को डुबो दिया था।
पाकिस्तान की नई सबमरीन क्यों है खास?
पाकिस्तान की हंगोर क्लास सबमरीन एयर इंडिपेंटेंड प्रपल्शन तकनीक से लैस है, जो पाकिस्तानी नेवी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि लेकर आई है। पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों के विपरीत AIP से लैस पनडुब्बियां हफ्तों तक पानी के भीतर रह सकती है। इसके चलते समुद्री गश्ती विमानों, सैटेलाइट और पनडुब्बी रोधी उपकरणों से पता लगाए जाने की संभावना काफी कम हो जाती है। भारतीय नौसेना पहले से ही इस तकनीक की सबमरीन का इस्तेमाल कर रही है।
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