'सिंधु संधि को हथियार बना रहे मोदी, तनाव की सबसे बड़ी वजह', भारतीय दूत ने खोली पोल तो बौखलाए पाकिस्तानी एक्सपर्ट
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12-08-2026 03:45 PM
इस्लामाबाद: बीते साल अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्ते निचले स्तर पर हैं। एक साल से ज्यादा की तनातनी के बाद ऐसी आवाजें सामने आई हैं, जो बातचीत और संबंधों में बेहतरी पर जोर दे रही हैं। पिछले महीने भारत और पाकिस्तान के 117 एक्टिविस्ट और पूर्व अधिकारियों ने नरेंद्र मोदी और शहबाज शरीफ को खुला खत लिखा है। इसमें दोनों प्रधानमंत्रियों से बातचीत शुरू करने की अपील की गई है। इस सबसे बीच पाकिस्तानी एक्सपर्ट का कहना है कि दिल्ली के रवैये की वजह से संबंधों में कड़वाहट है। उन्होंने सारी 'गड़बड़' के लिए भारत पर दोष मढ़ते हुए कहा है कि नरेंद्र मोदी सरकार की नीति पाकिस्तान विरोध की है।जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और पूर्व राजदूत तौकीर हुसैन ने डॉन में लिखे अपने लेख में कहा है कि एक्टिविस्ट के शरीफ और मोदी को लिखे पत्र का कोई फायदा नहीं होगा। हुसैन ने संबंधों में खराबी का ठीकरा भारत के सिर फोड़ते हुए कहा है कि दोनों देशों के तनावपूर्ण रिश्तों के पीछे नरेंद्र मोदी सरकार की नीति है। यह इस्लामाबाद के लिए भारत के नकारात्मक रुख को दिखाती है, जिसमें बदलाव का कोई संकेत नहीं है।पाकिस्तान पर नरेंद्र मोदी की नीति
हुसैन का कहना है कि पाकिस्तान पर नरेंद्र मोदी का सख्त रुख कोई नई बात नहीं है। अमूमन भारतीय नेताओं का यही रुख रहा है। फिर भी मोदी के रवैये में कुछ पहलू नए दिखे हैं। पारंपरिक रूप से भारत की एक विदेश नीति और एक पाकिस्तान नीति रही है। फिर भी 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से मोदी की पाकिस्तान नीति में असहिष्णुता का स्तर पहले से बढ़ा है।पीएम नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद और सुरक्षा मुद्दों को एक साथ जोड़ा है और भारतीयों की सोच पर उनका असर बढ़ाया है। साल 2016 में पठानकोट हमले के बाद से मोदी सरकार ने अपने देश के लोगों में पाकिस्तान के प्रति नजरिया काफी ज्यादा सख्त किया है। पाकिस्तान से बातचीत ना करके दिल्ली की कोशिश इस्लामाबाद को अहमियत नहीं देने की है।
सिंधु जल संधि का मामला
हुसैन का कहना है कि पानी के मुद्दे को नरेंद्र मोदी की सरकार ने 'हथियार' बना लिया है। भारत सिंधु जल संधि (IWT) का इस्तेमाल दोनों देशों के बीच विवाद को दूसरे मुद्दों पर दबाव बनाने के लिए कर रहा है। उन्होंने अमेरिका में भारत के राजदूत के हालिया लेख का हवाला दिया, जिसमें संधि को निलंबित करने के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया गया है। हुसैन ने कहा कि इससे चीजें बेहतरी की ओर नहीं जाएंगी। फिलहाल बातचीत शुरू करने और उसके सफल होने के लिए कोशिश की जरूरत है। दोनों ओर से काफी कुछ बदले बिना कोई भी बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंचेगी।