'वो मेरे लिए पिता जैसे हैं', पेरिस ओलंपिक में मनु भाकर ने रचा था इतिहास, नहीं रहे 'द्रोणाचार्य' जसपाल राणा

Updated on 12-06-2026 12:42 PM
नई दिल्ली: एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता मशहूर निशानेबाज और कोच के रूप में मनु भाकर को पेरिस ओलंपिक में दो पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले जसपाल राणा का निधन हो गया है। वह 49 वर्ष के थे। राणा हाल में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ विश्व कप से भारतीय दल की वापसी की उड़ान के दौरान बीमार पड़ गए थे और उन्हें एक चिकित्सा प्रक्रिया से गुजरना पड़ा था। मनु के दिल में जसपाल राणा का स्थान एक कोच से ज्यादा एक पिता जैसा था। कुछ ही समय पहले मनु ने बताया था कि जसपाल का स्थान उनकी कामयाबी में कितना बड़ा है।

पिता के रूप में जसपाल को देखतीं थीं मनु

मनु ने एक बार कहा था कि उनके दिल में जसपाल राणा का स्थान हमेशा उनके मुख्य कोच के रूप में ही रहेगा। दोनों के बीच का यह गहरा रिश्ता पेरिस में भारत की ऐतिहासिक कामयाबी की सबसे बड़ी वजह बना था। ओलिंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर अपने कोच जसपाल राणा को सिर्फ एक मार्गदर्शक नहीं बल्कि अपने पिता समान मानती थीं। उनके बीच का यह करीबी रिश्ता खेल के मैदान पर एक कड़े अनुशासन और आपसी भरोसे की नींव पर टिका हुआ था।
जसपाल राणा की कोचिंग और उनकी काबिलियत की तारीफ करते हुए मनु भाकर ने एक बार कहा था, 'ईमानदारी से कहूं तो मुझे सिर्फ एक ही बात कहनी है कि वह ही मेरे कोच हैं, मैं बस इतना ही जानती हूं। वह जो करते हैं, उसमें बेहद माहिर और असाधारण रूप से प्रतिभाशाली हैं। वह मेरे लिए एक बेहतरीन कोच रहे हैं। मैं बस इतना कह सकती हूं कि वह मेरे कोच हैं, बेशक वह किसी और के भी कोच हो सकते हैं लेकिन मेरे लिए वह हमेशा मेरे ही कोच रहेंगे।'

आज सुबह अस्पताल में कराया था भर्ती

आज सुबह ही नई दिल्ली में उतरते ही जसपाल राणा तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया और उन्हें स्टेंट डाले गए थे। राणा भारतीय पिस्टल निशानेबाजों के लिए हाई परफार्मेंस कोच के रूप में कार्यरत थे। एक उत्कृष्ट निशानेबाज के रूप में शानदार करियर के बाद राणा जूनियर राष्ट्रीय टीम के कोच और हाई परफॉर्मेंस कोच के रूप में अपनी भूमिकाओं से भारतीय निशानेबाजी में बदलाव लेकर आए।

मनु भाकर को जिताए दो मेडल

कोच के रूप में उनकी सबसे बड़ी सफलता पेरिस में 2024 में खेले गए ओलंपिक खेलों में मनु भाकर को दो कांस्य पदक जीतने में मदद करना था। वह 2012 से जूनियर पिस्टल कोच थे और उनकी देखरेख में ही सौरभ चौधरी, अनीश भानवाला और चिंकी यादव जैसे निशानेबाज उभर कर सामने आए थे। उन्होंने जूनियर स्तर पर अभूतपूर्व कार्य करके कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी तैयार किए।

एनआरएआई ने उन्हें आधिकारिक तौर पर 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा के लिए हाई-परफॉर्मेंस कोच के रूप में नियुक्त किया था। उन्होंने कोचिंग के नए मानदंड स्थापित किए थे। खेल में उनके अपार योगदान और निशानेबाजों की अगली पीढ़ी को तैयार करने में योगदान देने के लिए सरकार ने उन्हें 2020 में प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया था।

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