भोपाल। मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी बंद कमरों में बैठकर आंकड़ेबाजी कर रही है कि स्मार्ट मीटर से उपभोक्ताओं को फायदा हो रहा है, लेकिन जमीन पर यह 'फायदा' उपभोक्ताओं के लिए झटका साबित हो रहा है।
जमीनी हकीकत यह है कि कंपनी के इन कथित दावों की आड़ में आम जनता को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और उनके घरेलू बजट की धज्जियां उड़ गई हैं।
बिना अनुमति बदले मीटर
अवधपुरी और विद्या नगर के उपभोक्ताओं का आरोप है कि उपभोक्ताओं के कड़े विरोध और बिना किसी पूर्व लिखित सूचना के पुराने मीटर हटाकर स्मार्ट मीटर लगा दिए गए। नतीजा यह हुआ कि लोगों के मासिक बिल सीधे दोगुना हो गए और कई घरों में तो सीधे 16 हजार रुपये तक के बिल भेजकर कंगाली की कगार पर खड़ा कर दिया गया है। शिकायतों की फाइलें खुलती रहीं, लेकिन राहत नहीं मिली। अब सवाल यह है कि आखिर स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए हैं या फिर जेब पर अतिरिक्त बोझ डालने के लिए।
अवधपुरी: विरोध के बावजूद बदले मीटर
अवधपुरी स्थित सौम्या पार्कलैंड के रहवासियों का आरोप है कि उन्हें बिना पूर्व सूचना दिए पुराने बिजली मीटर हटाकर स्मार्ट मीटर लगा दिए गए। उपभोक्ताओं ने मौके पर ही इसका विरोध किया, लेकिन उनकी आपत्ति को नजरअंदाज कर मीटर बदल दिए गए। इसके बाद बिजली बिलों में अचानक भारी बढ़ोतरी होने लगी। अंबुज शुक्ला का कहना है कि पहले की तुलना में उनका बिल दोगुना से भी अधिक आने लगा है।
उन्होंने लिखित और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
गरिमा दुबे अरोड़ा बताती हैं कि पहले उनका बिल करीब 1500 रुपये आता था, जो स्मार्ट मीटर लगने के बाद दोगुने से भी ज्यादा हो गया। उन्होंने 23 जून को बिजली कंपनी की वेबसाइट पर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
वहीं सुमित श्रीवास्तव का मामला सबसे चौंकाने वाला है। उनका कहना है कि पहले करीब 1500 रुपये का बिजली बिल आता था, लेकिन इस बार उन्हें सीधे 16 हजार रुपये का बिल थमा दिया गया। उन्होंने बिजली कंपनी में आवेदन देने के बाद भी जब कोई समाधान नहीं मिला तो 20 जून को सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई।
विद्या नगर: तीन महीने का बिल एक साथ, सब्सिडी भी गई और पेनाल्टी भी लगी
विद्या नगर के उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिजली कंपनी ने तीन-तीन महीने का बिल एक साथ जारी कर दिया। सब्सिडी का लाभ भी नहीं मिल सका और ऊपर से पेनाल्टी भी जोड़ दी गई। यहां की निवासी हेमारानी कटारिया का कहना है कि कंपनी की गलती का खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है।
वहीं कई उपभोक्ताओं का आरोप है कि छह हजार रुपये से अधिक का बिल आने पर शिकायत की गई तो कंपनी केवल करीब एक हजार रुपये की राहत बताकर बाकी राशि जमा कराने का दबाव बना रही है।
बिजली उपभोक्ता अधिकार
विद्युत अधिनियम 2003 और केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के 'उपभोक्ता अधिकार नियम 2020' के तहत बिजली उपभोक्ताओं के लिए स्पष्ट कानूनी सुरक्षा तंत्र तय किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट और नियामक आयोगों के अनुसार, किसी भी परिसर में मीटर बदलने से पहले उपभोक्ता को स्पष्ट लिखित सूचना और प्रक्रिया की जानकारी देना अनिवार्य है।
बिल में कोई गड़बड़ी है तो उपभोक्ता को शिकायत दर्ज कराने और 'चेक मीटर' के जरिये उसकी निष्पक्ष जांच कराने का पूरा कानूनी अधिकार है। विवादित बिलों का एक निश्चित समयसीमा के भीतर समाधान करना बिजली कंपनी की जिम्मेदारी है।