वॉशिंगटन: अमेरिका ने शुक्रवार को इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने यह घोषणा दक्षिण अफ्रीकी कानून विशेषज्ञ और ICC की पूर्व जज नवी पिल्लै को नोबेल शांति पुरस्कार मिलने के कुछ घंटों बाद की। इस कदम के साथ वैश्विक न्यायाधिकरण के साथ उसका टकराव और बढ़ गया है। ICC की डिप्टी प्रॉसिक्यूटर नजहत शमीम खान ने इन प्रतिबंधों की निंदा की और कहा कि इनसे ट्रिब्यूनल का काम नहीं रुकेगा।अमेरिका ने ये प्रतिबंध ऐसे समय में लगाए हैं, जब युद्ध अपराधं के आरोपों पर मुकदमा चलाने के कोर्ट के अधिकार को लेकर वॉशिंगटन के साथ उसका टकराव बढ़ गया है। अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने इस फैसले का ऐलान करते हुए कहा कि वाशिंगटन अमेरिकी नागरिकों, सैन्य कर्मियों या राजनीतिक नेताओं पर अदालत के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं करेगा।ICC को रुबियो की धमकी
रुबियो ने एक बयान में कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप कभी अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय को अमेरिकियों पर मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं देंगे। इसीलिए संयुक्त राज्य अमेरिका अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय पर प्रतिबंध लगा रहा है। हम इस दुष्ट अदालत के साथ लेन-देन पर प्रतिबंध लगाएंगे, उनके संसाधनों को काट देंगे और उनके संचालन की क्षमता को पंगु बना देंगे।"
ये प्रतिबंध कार्यकारी आदेश 14203 के तहत लगाए गए हैं, जो अदालत और वाशिंगटन द्वारा विरोध की जाने वाली कुछ जांचों या कार्यवाहियों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ प्रतिबंधों को अधिकृत करता है। विदेश विभाग ने कहा कि अमेरिका ने पहले इस आदेश के तहत 17 लोगों पर प्रतिबंध लगाए थे। शुक्रवार की कार्रवाई ने इन प्रतिबंधों को संस्था तक बढ़ा दिया है।कामकाज के लिए 180 दिनों की छूट
विदेश विभाग ने कहा कि अमेरिका ने पहले इस आदेश के तहत 17 लोगों पर प्रतिबंध लगाए थे। शुक्रवार की कार्रवाई ने इन प्रतिबंधों को संस्था तक बढ़ा दिया है। नए आदेश के तहत अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में अदालत की संपत्ति और संपत्ति में निहित हितों को ब्लॉक कर दिया गया है। हालांकि वित्त विभाग ने साथ ही कई सामान्य लाइसेंस जारी किए हैं, जिससे कुछ निर्धारित गतिविधियों को जारी रखने की अनुमति दी गई है।
इनमें अदालत के संचालन को बनाए रखने के लिए आवश्यक कुछ गतिविधियों के लिए 180 दिन का प्राधिकरण शामिल है, साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं, जिसमें क्लाउड कंप्यूटिंग और सॉफ्टवेयर शामिल हैं, पेंशन व्यवस्था और आईसीसी के बंदियों से संबंधित गतिविधियों को कवर करने वाले अलग-अलग प्राधिकरण भी शामिल हैं।रुबियो बोले- ICC को खत्म कर देंगे
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि अस्थायी परिचालन प्राधिकरण का उद्देश्य अदालत के संस्थापक संधि के पक्षकार देशों को अमेरिकी चिंताओं को दूर करने के लिए समय देना है। विदेश सचिव रुबियो ने कहा कि वाशिंगटन ने राजनयिक प्रयासों के जरिए बदलाव की मांग करते हुए संस्था पर प्रतिबंध लगाने में देरी की थी। उन्होंने कहा, "हालांकि, न तो आईसीसी ने और न ही सदस्य देशों ने अभी तक हमारी चिंताओं को दूर करने के लिए कोई सार्थक कदम उठाया है।"
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बातचीत विफल रही तो आगे और कदम उठाए जा सकते हैं और कहा, "या तो आईसीसी अपनी धमकियां खत्म करेगा या हम आईसीसी को खत्म कर देंगे।" हेग स्थित अदालत ने वाशिंगटन के आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि प्रतिबंधों का उद्देश्य उसके न्यायिक काम में बाधा डालना है।अमेरिकी प्रतिबंधों पर ICC का बयान
आईसीसी ने कहा, "यह कदम एक स्वतंत्र न्यायिक संस्था को निशाना बनाता है, जिसे संधि द्वारा बनाया गया है और 125 सदस्य देशों द्वारा नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराधों, युद्ध अपराधों और आक्रामकता के अपराध की जांच और अभियोजन का जिम्मा सौंपा गया है।" उसने प्रतिबंधों को अदालत को अपना जनादेश पूरा करने से रोकने और उसके साथ काम करने वालों को डराने-धमकाने का प्रयास बताया। आईसीसी की अध्यक्ष टोमोको अकाने ने कहा कि न्यायाधिकरण प्रतिबंधों के बावजूद अपना काम जारी रखेगा।