तारिक रहमान से डील या सबसे बड़ा दांव, शेख हसीना फांसी के खतरे के बीच क्यों लौट रहीं हैं बांग्लादेश
Updated on
15-07-2026 02:23 PM
ढाका: भारत में करीब दो साल निर्वासित जीवन बिताने के बाद बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस साल के आखिर में देश लौटने का ऐलान किया है। अगस्त 2024 की शुरुआत में एक बड़े छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना को सत्ता से हटा दिया गया था। इसके बाद वह भागकर भारत आ गई थीं और तब से यहीं रह रही हैं। बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार ने शेख हसीना के देश लौटने का प्लान का 'स्वागत' किया है और कहा है कि वे कोर्ट में अपने खिलाफ आरोपों का सामना करें।राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा दांव
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर शेख हसीना बांग्लादेश लौटने के अपने फैसले पर कायम रहती हैं, तो यह उनके लंबे और चर्चित करिया का शायद सबसे बड़ा राजनीतिक दांव होगा। शेख हसीना को शरण देने के भारत के फैसले ने नई दिल्ली और ढाका के रिश्तों में तनाव पैदा कर दिया था। हालांकि, इसी साल फरवरी में तारिक रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश नेशलिस्ट पार्टी की सरकार आने के बाद दोनों पड़ोसियों के रिश्ते स्थिर हुए हैं।हसीना के साथ ही तारिक सरकार की भी परीक्षा
ऐसे में हसीना की वापसी न केवल उनकी और उनके समर्थकों, बल्कि बांग्लादेश के नेतृत्व और समाज की भी परीक्षा होगी। तो नई दिल्ली के लिए भी इसके अहम नतीजे होंगे। हसीना को बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल (ICT) ने मौत की सजा सुनाई है। ट्रिब्यूनल ने हसीना को 2024 में उनकी सरकार के खिलाफ प्रदर्शनों को दबाने में कथित भूमिका के लिए मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहराया गया है। हालांकि, मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के समय में चले मुकदमे की निष्पक्षता पर भी सवाल उठे हैं।हसीना ने कहा है कि उनकी वापसी का मकसद उनके और उनकी पार्टी अवामी लीग पर लगे प्रतिबंधों के खिलाफ लड़ना है। बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार ने इस घोषणा पर कहा है कि वह उनकी वापसी का स्वागत करेगी। तारिक रहमान के सलाहकार जाविद उर रहमान ने मंगलवार को कहा कि शेख हसीना को दुनिया के सबसे अच्छे वकीलों को लेकर आना चाहिए और कोर्ट का सामना करना चाहिए।
क्या तारिक रहमान सरकार से डील?
ऐसी अटकलें लग रही हैं कि बांग्लादेश की मौजूदा तारिक रहमान सरकार ने शेख हसीना के साथ किसी तरह का समझौता किया है। या शायद हसीना को लगता है कि बांग्लादेश में उनके पास अभी भी इतना समर्थन हासिल है कि वह अपनी मौत की सजा के खिलाफ मजबूत विरोध खड़ा कर सकती हैं। ऐसे में उनकी वापसी से साफ हो जाएगा कि बांग्लादेश में उनका और अवामी लीग का कोई भविष्य है या नहीं।