बॉलीवुड में आंखों से भावनाएं बयां करने और हर किरदार में जान डालने वाली तब्बू आज 55 साल की हो गईं। करीब चार दशक के करियर में उन्होंने शोहरत, सम्मान और कई बड़े पुरस्कार हासिल किए, लेकिन निजी जिंदगी आसान नहीं रही। तीन साल की उम्र में माता-पिता का तलाक हो गया और पिता से रिश्ता नहीं बन पाया। जवानी में संजय कपूर के साथ रिश्ता शुरू हुआ, लेकिन फिल्म की शूटिंग खत्म होने से पहले दोनों की बातचीत बंद हो गई।

साजिद नाडियाडवाला के साथ रिश्ते की चर्चा शादी तक पहुंची, जबकि नागार्जुन के साथ उनका नाम करीब एक दशक तक जुड़ा रहा। काले हिरण शिकार मामले में नाम आने के बाद उन्हें लंबे समय तक कानूनी विवाद का सामना करना पड़ा।

जन्मदिन पर जानते हैं तब्बू की जिंदगी के पांच मुश्किल और चर्चित पहलुओं के बारे में।

तीन साल की उम्र में माता-पिता का तलाक, पिता को देखने की इच्छा तक नहीं हुई

तब्बू की जिंदगी का पहला बड़ा भावनात्मक मोड़ बचपन में आया। उनका जन्म 4 नवंबर 1971 को हैदराबाद में हुआ था। तीन साल की उम्र में उनके माता-पिता का तलाक हो गया। इसके बाद पिता जमाल हाशमी से उनका खास संपर्क नहीं रहा। उनकी परवरिश मां रिजवाना और नाना-नानी के घर हुई। परिवार के बिखराव ने बचपन में उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी।

हालांकि, तब्बू ने बचपन को केवल दुख और अभाव के रूप में याद नहीं किया। उन्होंने बताया था कि हैदराबाद में नाना-नानी के साथ उनका बचपन अच्छा बीता। मां टीचर थीं और काम के कारण तब्बू का काफी समय नानी के साथ गुजरता था। ये बातें उन्होंने सिमी ग्रेवाल के चैट शो 'Rendezvous with Simi Garewal' में साझा की थीं। तब्बू ने बताया कि उनकी नानी पूजा-पाठ करती थीं और किताबें पढ़ती थीं। वह उनके आसपास रहकर बड़ी हुईं।

तब्बू ने स्वीकार किया था कि बचपन में वह बहुत संकोची थीं। अभिनेत्री बनने के बाद भी उनमें खुलकर बात कहने का आत्मविश्वास नहीं था। बातचीत का सबसे भावुक हिस्सा तब आया, जब उनसे पिता के बारे में पूछा गया। तब्बू ने बताया कि उन्होंने पिता को कभी नहीं देखा। उनकी बड़ी बहन फराह कभी-कभी पिता से मिलने जाती थीं, लेकिन तब्बू को उनसे मिलने की इच्छा नहीं हुई।

उन्होंने पिता का सरनेम 'हाशमी' न लगाने की वजह भी बताई। तब्बू के मुताबिक, उन्होंने नहीं सोचा कि पिता का सरनेम लगाना जरूरी है। स्कूल में उनका सरनेम फातिमा था और वह इसी पहचान के साथ बड़ी हुईं। उन्होंने कहा था, 'मेरे पास उनकी कोई याद नहीं है। मैं उनसे मिलने के लिए कभी उत्सुक नहीं रही। मैं उनके बारे में जानने को उत्सुक नहीं हूं। मैं जैसी हूं और जिस तरह बड़ी हुई हूं, उससे खुश हूं।'

उनके बयान में पिता के प्रति दूरी के साथ परिवार और बचपन को लेकर संतुष्टि भी नजर आती है। किसी बच्चे के लिए पिता की मौजूदगी सिर्फ रिश्ते तक सीमित नहीं, बल्कि यादों, सुरक्षा और भावनात्मक जुड़ाव से भी जुड़ी होती है। हालांकि, तब्बू ने इस कमी को अपनी पहचान पर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने मां और नाना-नानी के साथ बिताए समय को जिंदगी का अहम हिस्सा बनाया।


संजय कपूर से पहला प्यार, फिल्म की शूटिंग खत्म होते-होते बातचीत बंद

तब्बू के शुरुआती फिल्मी करियर के दौरान निजी जिंदगी में भी नया रिश्ता शुरू हुआ था। यह अभिनेता संजय कपूर के साथ था। दोनों की मुलाकात फिल्म 'प्रेम' की शूटिंग के दौरान हुई थी। संजय कपूर की यह डेब्यू फिल्म 1995 में रिलीज हुई।

फिल्म में दोनों की जोड़ी पर्दे पर नजर आई। इसी दौरान वे करीब आए और डेट करने लगे। दोनों करियर की शुरुआत कर रहे थे। संजय कपूर की यह पहली फिल्म थी, जबकि तब्बू इंडस्ट्री में जगह बनाने की कोशिश कर रही थीं।

इस रिश्ते की पुष्टि किसी गॉसिप रिपोर्ट ने नहीं, बल्कि संजय कपूर ने खुद इंटरव्यू में की थी।

संजय कपूर ने ETimes को दिए पुराने इंटरव्यू में तब्बू के साथ रिश्ते पर बात की थी। उन्होंने बताया था कि फिल्म 'प्रेम' की शूटिंग के शुरुआती दौर में वह तब्बू को डेट कर रहे थे।

संजय का बयान खास है, क्योंकि उन्होंने पहली बार तब्बू के साथ रिश्ते को लेकर अटकलों पर खुद बात की थी।

फिल्म 'प्रेम' की शूटिंग आसान नहीं रही थी। इसे बनने में करीब छह साल लगे थे। शुरुआत में शेखर कपूर निर्देशक थे, लेकिन बाद में सतीश कौशिक ने निर्देशन किया। लंबे समय तक शूटिंग चली और इसी दौरान संजय-तब्बू के रिश्ते में भी बदलाव आया।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में रिश्ते के टूटने की वजह संजय कपूर और महीप कपूर की नजदीकियों को बताया गया। हालांकि, तब्बू ने इसकी सार्वजनिक पुष्टि नहीं की है।


साजिद नाडियाडवाला से शादी की चर्चा हुई, लेकिन रिश्ता दोस्ती तक सिमटा

संजय कपूर से रिश्ता खत्म होने के बाद तब्बू का नाम फिल्म निर्माता साजिद नाडियाडवाला से जुड़ा। उस दौर में दोनों के रिश्ते की काफी चर्चा हुई। तब्बू ने इस बारे में पुराने इंटरव्यू में खुद बात की थी।

4 अप्रैल 1997 को रेडिफ को दिए इंटरव्यू में तब्बू से निजी रिश्तों और शादी के बारे में पूछा गया था। साजिद नाडियाडवाला को डेट करने के सवाल पर उन्होंने साफ कहा था कि उस समय दोनों एक-दूसरे को डेट कर रहे थे।

शादी की संभावना पर उन्होंने कहा था कि फिलहाल कोई योजना नहीं है और कम से कम अगले कुछ साल तक शादी उनके एजेंडे में नहीं है। यह इंटरव्यू अहम है, क्योंकि तब्बू ने खुद स्वीकार किया था कि वह साजिद के साथ रिश्ते में थीं।

साजिद नाडियाडवाला की निजी जिंदगी भी उस समय मुश्किल दौर से गुजरी थी। उनकी पहली पत्नी, अभिनेत्री दिव्या भारती का 1993 में निधन हो गया था। उनकी असमय मौत के बाद साजिद के जीवन में काफी बदलाव आए। उस दौर में तब्बू और दिव्या की दोस्ती की भी चर्चा होती रही।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तब्बू और साजिद करीब आए और कुछ समय तक साथ रहे। हालांकि, रिश्ता शादी तक नहीं पहुंच सका।

2011 में 'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' ने तब्बू और साजिद की दोस्ती पर रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इसमें बताया गया कि कपल वाला रिश्ता खत्म हो चुका था, लेकिन दोनों दोस्त बने रहे।

रिपोर्ट में साजिद ने कहा था कि वह और तब्बू आज भी दोस्त हैं। उन्होंने बताया था कि तब्बू को पद्मश्री मिलने के बाद दोनों ने काफी देर तक बात की। साजिद ने कहा था कि तब्बू के साथ समय बीतने का एहसास ही नहीं होता।

तब्बू ने निजी जिंदगी को लेकर ज्यादा खुलासा नहीं किया। उन्होंने रिश्ता स्वीकार किया, लेकिन उसके खत्म होने की वजहों पर सार्वजनिक रूप से विस्तार से बात नहीं की।

शादी न होने के पीछे कोई एक निश्चित वजह थी, यह कहना सही नहीं होगा। हालांकि, 1997 के इंटरव्यू से पता चलता है कि उस समय साजिद उनकी जिंदगी में खास जगह रखते थे और दोनों के बीच शादी को लेकर सवाल उठ चुके थे।


नागार्जुन से करीब एक दशक तक जुड़ा नाम, रिश्ते को नहीं दिया कोई नाम

तब्बू का सबसे चर्चित रिश्ता साउथ के सुपरस्टार नागार्जुन से जोड़ा जाता है। दोनों की नजदीकियों की खबरें कई साल तक मीडिया में आती रहीं। रिपोर्ट्स में दावा था कि दोनों करीब दस साल तक करीब रहे। नागार्जुन पहले से शादीशुदा थे और उनकी पत्नी अमला अक्किनेनी हैं।

इस रिश्ते पर चर्चा का दिलचस्प हिस्सा 2007 में सामने आया, जब तब्बू फिल्ममेकर करण जौहर के शो 'कॉफी विद करण' में पहुंची थीं। शो में करण ने उनसे दक्षिण भारत के उस अभिनेता के बारे में पूछा, जिनके साथ उनका नाम लंबे समय से जुड़ा था। तब्बू ने पहले सवाल टालने की कोशिश की, लेकिन फिर नागार्जुन का नाम ले लिया। उन्होंने कहा था कि यह अफवाह उनकी जिंदगी में बनी हुई है और मीडिया हर कुछ साल में इस रिश्ते पर सवाल पूछता रहता है।

नागार्जुन के बारे में तब्बू का अगला बयान इस रिश्ते को समझने के लिहाज से अहम है। उन्होंने कहा था कि नागार्जुन उनकी जिंदगी के सबसे करीबी लोगों में से एक हैं और उनका रिश्ता बेहद खास है। तब्बू ने कहा कि वह इस रिश्ते को कोई नाम नहीं दे सकतीं। करण जौहर ने इसे दोस्ती कहने का सुझाव दिया, तो तब्बू ने कहा कि दोस्ती शब्द का कई बार गलत इस्तेमाल होता है। बातचीत से साफ हुआ कि तब्बू नागार्जुन को जिंदगी में बेहद अहम मानती थीं, लेकिन रिश्ते को किसी तय नाम में बांधना नहीं चाहती थीं।

2017 में नागार्जुन ने 'द टाइम्स ऑफ इंडिया' को दिए इंटरव्यू में तब्बू को अपनी बहुत अच्छी दोस्त बताया था। उन्होंने कहा था कि उनकी दोस्ती कई साल पुरानी है और तब्बू का नाम सुनते ही उनका चेहरा खिल उठता है।

मीडिया में खबरें आईं कि तब्बू रिश्ते में स्थिरता चाहती थीं, लेकिन नागार्जुन पारिवारिक जिंदगी से अलग नहीं होना चाहते थे। हालांकि, तब्बू और नागार्जुन ने इन दावों की पुष्टि नहीं की। इसलिए रिश्ता किस वजह से खत्म हुआ या शादी की उम्मीद थी, यह पूरी तरह प्रमाणित नहीं है। तब्बू ने नागार्जुन के लिए जिस खास जुड़ाव का जिक्र किया था, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह उनके जीवन में महत्वपूर्ण व्यक्ति रहे हैं।

काले हिरण केस में नाम आने से सालों विवादों में रहीं, अदालत के चक्कर लगाने पड़े

तब्बू की जिंदगी का पांचवां मुश्किल दौर 1998 में शुरू हुआ। फिल्म 'हम साथ-साथ हैं' की शूटिंग के दौरान जोधपुर में काले हिरण के शिकार का मामला सामने आया।

इस मामले में सलमान खान के साथ तब्बू, सैफ अली खान, सोनाली बेंद्रे और नीलम भी सह-आरोपी के तौर पर सामने आए थे।

शूटिंग के दौरान हुई इस घटना ने पूरे बॉलीवुड को विवादों में ला दिया। मामला अदालत पहुंचा और सुनवाई सालों तक चली।

यह विवाद तब्बू के लिए मुश्किल रहा, क्योंकि उनका नाम लगातार मीडिया की सुर्खियों में रहने लगा। वह फिल्मों में अभिनय के लिए पहचान बना रही थीं, वहीं अदालत में चल रहे मामले पर सार्वजनिक सवालों का सामना भी कर रही थीं।

करीब दो दशक चले मामले में 5 अप्रैल 2018 को जोधपुर की अदालत ने फैसला सुनाया। सलमान खान दोषी ठहराए गए, जबकि तब्बू, सैफ अली खान, सोनाली बेंद्रे और नीलम संदेह का लाभ देकर बरी कर दिए गए।

मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। मई 2025 में राजस्थान सरकार ने तब्बू और अन्य सह-आरोपियों की बरी होने के फैसले को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी। अपील पर सुनवाई की तारीख तय की गई थी।


तब्बू बोलीं- सिंगल होना बुरा नहीं, गलत पार्टनर से बेहतर है अकेले रहना

तब्बू की निजी जिंदगी में कई रिश्ते अधूरे रहे, लेकिन वह इसे नाकामी नहीं मानतीं। अकेले रहने को भी वह अभिशाप नहीं समझतीं। 23 मार्च 2019 को हिंदुस्तान टाइम्स ब्रंच को दिए इंटरव्यू में उन्होंने निजी जिंदगी और रिश्तों पर बात की थी।

इस दौरान उन्होंने कहा था, "मुझे नहीं लगता कि सिंगल होना कोई बुरी बात है। पहले अकेले रहने को लेकर समाज में एक तरह का कलंक था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। आपकी खुशी कई ऐसी चीजों से आती है, जिनका आपके रिलेशनशिप स्टेटस से कोई लेना-देना नहीं होता। आप अकेले रहकर अपने अकेलेपन से निपट सकते हैं, लेकिन गलत पार्टनर के साथ रहने पर उससे भी ज्यादा तकलीफदेह स्थिति पैदा हो सकती है।"

तब्बू ने बताया था कि करियर में आगे बढ़ते हुए वह काम करना और अकेले दुनिया देखना चाहती थीं। उनके मुताबिक, रिश्ते के लिए सपनों और क्षमताओं को छोड़ना खुद के साथ नाइंसाफी होती। उन्होंने कहा था कि आदर्श रिश्ता वह है, जिसमें दो लोग एक-दूसरे की जिंदगी का हिस्सा बनकर आगे बढ़ें। रिश्ते आजादी देने वाले होने चाहिए, बांधने वाले नहीं।

निजी जिंदगी में मुश्किलों के बावजूद करियर में बनाया अलग मुकाम

तब्बू ने 1980 के दशक में बाल कलाकार के तौर पर काम शुरू किया था। फिल्म 'प्रेम' से उन्हें अभिनेत्री के तौर पर पहचान मिली। 1996 में आई 'माचिस' ने करियर को नई दिशा दी। इस फिल्म के लिए उन्हें नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला।

'विरासत', 'अस्तित्व', 'चांदनी बार' और 'मकबूल' जैसी फिल्मों ने उन्हें गंभीर अभिनेत्री के तौर पर स्थापित किया। 'चांदनी बार' के लिए दूसरा नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला।

उन्होंने हिंदी के अलावा तेलुगु, तमिल, मलयालम और अंग्रेजी फिल्मों में भी काम किया। हॉलीवुड फिल्म 'लाइफ ऑफ पाई' में भी नजर आईं।

2011 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। 'हैदर', 'दृश्यम', 'अंधाधुन' और 'भूल भुलैया 2' जैसी फिल्मों से साबित हुआ कि उम्र के साथ उनकी अदाकारी और परिपक्व हुई है।