आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जनक माने जाने वाले और नोबेल पुरस्कार विजेता जेफ्री हिंटन ने चेतावनी दी है कि AI का तेजी से बढ़ना आगे चलकर बड़ा खतरा बन सकता है। उनका कहना है कि बड़ी-बड़ी टेक कंपनियों के मालिक सुरक्षा की चिंता करने के बजाय केवल अपने फायदे और बिजनेस पर ध्यान दे रहे हैं। हिंटन ने आगाह करते हुए बताया है कि दुनिया को इस साल के अंत में या 2027 तक AI से जुड़े किसी बड़े संकट का सामना करना पड़ सकता है। इससे बिजली का पूरा सिस्टम बंद हो सकता है या पैसों का लेन-देन पूरी तरह ठप पड़ सकता है। इस बड़े खतरे की गंभीरता को समझाने के लिए उन्होंने इसकी तुलना 1986 में हुए भयानक चेरनोबिल परमाणु हादसे से की है।
तकनीक के खिलाफ नहीं
द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार, हिंटन का कहना है कि AI में समाज को बेहतर बनाने और बड़ी कमाई के मौके देने की पूरी ताकत है। हालांकि, वे इस तकनीक के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उनकी असली चिंता यह है कि क्या इंसान आगे चलकर इतने पावरफुल AI को अपने कंट्रोल में रख पाएंगे या नहीं।
AI कंपनियों के लीडर पर साधा निशाना
हिंटन के अनुसार, इसके नतीजे कुछ भी हो सकते हैं। हिंटन ने बड़ी AI कंपनियों के नेतृत्व की भी आलोचना की है। ओपनAI के CEO सैम ऑल्टमैन, मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग और टेस्ला तथा xAI के प्रमुख एलन मस्क पर निशाना साधते हुए, हिंटन ने आरोप लगाया कि इन कंपनियों के प्रमुख AI से जुड़े संभावित खतरों को समझते तो हैं, लेकिन वे इन खतरों से निपटने को उतनी प्राथमिकता देने के लिए तैयार नहीं हैं, जितनी देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि जुकरबर्ग, मस्क और सैम ऑल्टमैन जोखिमों को समझते हैं, लेकिन उन्हें कोई परवाह नहीं है। उन्हें बस पैसा चाहिए। मेरा यही मानना है। उन्होंने खासतौर से ओपनएआई (OpenAI) कंपनी में सैम ऑल्टमैन के काम करने के तरीके पर चिंता जताई है। यह कंपनी उन चुनिंदा अमेरिकी कंपनियों में से एक है, जो चीन से आगे निकलने के लिए लगातार नए और ज्यादा ताकतवर AI सिस्टम बनाने में लगी हुई है।
कभी डेवलप न करना ही बेहतर
हिंटन ने यह भी कहा कि हो सकता है कि इसे कभी डेवलप न करना ही हमारे लिए बेहतर होता। उन्होंने इस तकनीक के लंबे समय में होने वाले परिणामों को लेकर बनी अनिश्चितता की ओर इशारा किया है।
कंपनियां कैसे उठा पाएंगी फायदा?
उन्होंने चेतावनी दी है कि आने वाला दशक यह तय करने के लिए बहुत अहम होगा कि क्या सरकारें और टेक्नोलॉजी कंपनियां AI से जुड़े जोखिमों को संभालते हुए इसके आर्थिक फायदों का लाभ उठा पाएंगी या फिर यह तकनीक असमानता को और बढ़ाएगी, बेरोजगारी में तेजी लाएगी और समाज में बड़े पैमाने पर उथल-पुथल पैदा करेगी।