एयरक्राफ्ट कैरियर
ईरान के खिलाफ हमले में कम से कम दो अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर और कई युद्धपोतों ने हिस्सा लिया है। USS अब्राहम लिंकन और USS गेराल्ड आर फोर्ड ईरान पर हमले से पहले से ही मध्य पूर्व में तैनात हैं। इनमें से USS अब्राहम लिंकन ईरान के पास अरब सागर में और USS गेराल्ड आर फोर्ड भूमध्य सागर में इजरायल के पास तैनात है। CENTCOM ने ईरान पर हमले के दौरान F/A-18 और F-35 लड़ाकू विमानों के उड़ान भरने और लैंड करने का वीडियो जारी किया है। माना जा रहा है कि ये वीडियो USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर का है, क्योंकि, USS गेराल्ड आर फोर्ड पर F-35 लड़ाकू विमान तैनात नहीं हैं।
युद्धपोत
अमेरिकी नौसेना के वीडियो में गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर को टॉमहॉक मिसाइलें दागते हुए भी दिखाया गया है। वर्तमान में ईरान के पास कम से कम 6 अमेरिकी आर्ले बर्क-क्लास डिस्ट्रॉयर तैनात हैं। इनमें से हर एक 96 टॉमहॉक मिसाइलों से लैस है। ये डिस्ट्रॉयर एजिस बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम से लैस हैं, जो खुद के साथ अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर को भी ईरानी ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं।
पैट्रियट और THAAD मिसाइल डिफेंस सिस्टम
अमेरिका ने ईरान के हमलों से खुद को और अपने मित्र राष्ट्रों की परिसंपत्तियों की रक्षा के लिए पैट्रियट और THAAD (टर्मिनल हाई-एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस) सिस्टम को तैनात किया हुआ है। हालांकि, इसकी जानकारी नहीं है कि अमेरिका ने ईरानी खतरे का सामना करने के लिए अब तक कितने पैट्रियट और THAAD इंटरसेप्टर फायर किए हैं। ईरान ने मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइलें दागी हैं। ऐसे में सैन्य विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि अगर ऐसा लंबे समय तक चलता रहा तो अमेरिका के पास इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी हो सकती है।
लड़ाकू विमान
शनिवार से ही अमेरिका ने ईरान के खिलाफ हमले में कई तरह के लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया है। CENTCOM का कहना है कि ईरान पर हमले में F-16, F/A-18, F-22 और F-35 लड़ाकू विमान शामिल हैं। हालांकि, इनके खास मिशन के बारे में कुछ नहीं बताया गया है। CENTCOM ने जो वीडियो जारी किया है, उसमें F/A-18 और F-35 लड़ाकू विमान नजर आ रहे हैं। CENTCOM ने यह भी बताया है कि उसने A-10 अटैक जेट भी तैनात किए हैं।
EA-18G इलेक्ट्रॉनिक अटैक एयरक्राफ्ट
F/A-18 लड़ाकू विमान पर आधारित EA-18G इलेक्ट्रॉनिक अटैक एयरक्राफ्ट दुश्मन के रडार और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जाम कर सकता है। EA-18G ग्रोलर में जैमिंग पॉड्स, कम्युनिकेशन काउंटरमेज़र और रडार होते हैं। इससे दुश्मन की देखने और सुनने की शक्ति खत्म हो जाती है। इसमें मिसाइलें भी लगाई जा सकती हैं, जो दुश्मन के रडार और कम्युनिकेशन सेंटर पर हमला कर सकते हैं।
एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल एयरक्राफ्ट (AWACS)
अमेरिकी वायुसेना और नौसेना दो अलग तरह के AWACS इस्तेमाल करते है। अमेरिकी वायुसेना E-3 सेंट्री और नौसेना E-2 हॉकआई AWACS का इस्तेमाल करती है। अमेरिकी वायुसेना का E-3 सेंट्री बड़ा AWACS है, जिसकी रेंज 250 किमी तक है। यह AWACS दुश्मन के एयरक्राफ्ट और जहाजों की पहचान कर सकता है और उन्हें ट्रैक कर सकता है। वहीं, अमेरिकी नौसेना का हॉकआई कम रेंज में ऐसे ही खतरों का पता लगा सकता है।
