'अमेरिकी सैन्य अड्डे बोझ बन चुके', UAE में उठी यूएस आर्मी की मौजूदगी के खिलाफ आवाज, ट्रंप की बढ़ेगी टेंशन!

Updated on 20-04-2026 01:53 PM
दुबई: संयुक्त अरब अमीरात से एक अहम घटनाक्रम में अमेरिका की सैन्य ठिकानों के खिलाफ आवाज उठी है। राजनीतिक टिप्पणीकार और पश्चिम एशिया के एक्सपर्ट अब्दुल खालिक अब्दुल्ला ने कहा है कि यूएई को अपनी रक्षा के लिए अमेरिका की जरूरत नहीं है। ईरानी हमलों के खिलाफ हमने खुद को साबित कर दिया है। ऐसे में अरब खाड़ी से अमेरिकी ठिकानों को हटाया जाए। अब्दुल्ला का ये बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते पश्चिम एशिया में तनाव है। खाड़ी में यूएई को ईरान का विरोधी और अमेरिका-इजरायल का करीबी माना जाता है। यूएई से इस तरह की आवाज उठना डोनाल्ड ट्रंप की चिंता बढ़ा सकता है।

अब्दुल खालिक अब्दुल्ला ने अपने ट्वीट में बताया है कि उन्होंने एक न्यूज एजेंसी से ईरान युद्ध और अरब देशों में अमेरिकी आर्मी के बेस होने पर बात की है। अब्दुल्ला ने इस दौरान कहा कि यूएई को अमेरिका से हथियार खरीदने तक सीमित हो जाना चाहिए ना कि उनके बेस अपनी जमीन पर बनाने चाहिए।

'अमेरिकी सैन्य अड्डे बोझ बन चुके'

अब्दुल्ला ने कहा, 'ईरान के हमलों का मुकाबला करते हुए यूएई ने यह साबित कर दिया है कि उसको अब अपनी रक्षा के लिए अमेरिका की जरूरत नहीं है। इसलिए अब अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बंद करने के बारे में सोचने का समय आ गया है, क्योंकि वे एक बोझ बन गए हैं, ना कि कोई रणनीतिक संपत्ति।
अब्दुल्ला ने इस बात पर जोर दिया कि यूएई की प्राथमिकता विदेशी सैन्य अड्डों को जगह देने के बजाय अमेरिका से आधुनिक और उन्नत सैन्य उपकरण हासिल करना होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश को उपलब्ध सबसे बेहतरीन तकनीक का इस्तेमाल करके अपने खुद के रक्षा तंत्र को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।

व्यापार को नुकसान पर भी यूएई सख्त

यूएई ने खाड़ी देशों में तनाव से व्यापार को हो रहे नुकसान को लेकर भी अमेरिका से नाराजगी जताई है। वल स्ट्रीट जनरल ने बताया है कि यूएई ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से कहा कि इस युद्ध की शुरुआत आपने की है। अगर इसके चलते हमारे पास अमेरिकी डॉलर की कमी होती है तो आप हमें डॉलर स्वैप लाइन्स देंगे। ऐसा ना होने पर हम तेल और गैस का लेन-देन दूसरी मुद्राओं में करने पर मजबूर होंंगे।
अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था। इसके बाद 39 दिन तक लगातार क्षेत्र में लड़ाई जारी रही। इस लड़ाई से यूएई और खाड़ी के दूसरे देश भी प्रभावित हुए हैं। इसकी वजह इन देशों में अमेरिकी सेना की मौजूदगी है। ईरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को टारगेट किया है। इससे इन देशों में यह चर्चा है कि अमेरिकी सेना को जगह देने का फैसला गलत तो नहीं है।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 25 April 2026
माले: चीन के जासूसी जहाज ने ऐसा लगता है कि एक बार फिर से हिंद महासागर क्षेत्र में सर्वेक्षण का काम पूरा कल लिया है। उसरे रिसर्च जहाज 'शी यान 6'…
 25 April 2026
काठमांडू: नेपाल में बालेन शाह की सरकार के आदेश के बाद कस्टम जांच बढ़ाए जाने के बाद भारतीय सीमा से लगे एंट्री पॉइंट असामान्य रूप से शांत हो गए हैं। इसके…
 25 April 2026
वॉशिंगटन: ट्रंप प्रशासन ने चीन की एक बड़ी तेल रिफाइनरी पर प्रतिबंध लगा दिया है, क्योंकि उसने अरबों डॉलर का ईरानी तेल खरीदा था। यह कदम वाइट हाउस के उस व्यापक…
 25 April 2026
तेल अवीव: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को बताया कि उन्होंने चुपचाप प्रोस्टेट कैंसर का इलाज करवाया है। उन्होंने अपनी सालाना मेडिकल जांच के नतीजे भी सार्वजनिक किए। 76…
 25 April 2026
इस्लामाबाद: होर्मुज स्ट्रेट संकट ने दक्षिण एशियाई देशों पर गंभीर असर डाला है और भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत बाकी के देश बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। ऐसे में पाकिस्तान के…
 25 April 2026
मनीला: अमेरिका ने जापान और फ‍िलीपींस समेत कई सहयोगी देशों के साथ मिलकर सोमवार से फ‍िलीपींस में बाल्किस्‍तान 2026 नौसैनिक अभ्‍यास शुरू किया है। इस अभ्‍यास को जमीन से लेकर समुद्र…
 25 April 2026
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के दौरे पर पहुंचे ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तानी आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर से मुलाकात की है। अराघची शुक्रवार देर रात ईरानी प्रतिनिधिमंडल के…
 24 April 2026
ढाका: बांग्लादेश की वायु सेना में कुछ अधिकारियों और एयरमैन के पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के साथ गठजोड़ का पता लगने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। इसके बाद वायु सेना की…
 24 April 2026
तेल अवीव: पूरी दुनिया की नजर इजरायल के ईरान और लेबनान के साथ तनाव पर बनी हुई है। वहीं, इन सबके बीच तेल अवीव हजारों किलोमीटर दूर भारत में एक ऑपरेशन…
Advt.