अमेरिकी सरकार के पास कोरोना महामारी से निपटने के लिए कभी कोई प्लान ही नहीं था : ब्राइट

Updated on 17-05-2020 08:27 PM

वाशिंगटन। अमेरिका के पूर्व स्वास्थ्य अधिकारी रिक ब्राइट ने सीनेट के सामने जारी सुनवाई में यह कहकर सबको चौंका दिया है कि ट्रंप सरकार के पास इस महामारी से निपटने के लिए कभी कोई प्लान ही नहीं था। ब्राइट ने कहा अमेरिका कोरोना वायरस के कारण आधुनिक इतिहास के सबसे भयावह समय से गुजर रहा है। उल्लेखनीय है कि रिक ब्राइट अमरीका में उस एजेंसी का नेतृत्व कर रहे थे जो कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने में लगी है, लेकिन ट्रंप ने उन्हें हटा दिया था।
गौरतलब है कि बीते महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्राइट को ‘चिड़चिड़ा अधिकारी’ कहकर पद से हटा दिया था। हालांकि ब्राइट ने कहा था कि उन्हें पद से इसलिए हटा दिया गया था क्योंकि ट्रंप के सामने कोरोना वायरस को लेकर उनकी नीतियों का विरोध किया था। ब्राइट ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की हेल्थ पर बनी सबकमिटी से कहा कि अमेरिका में बड़ी संख्या में मौतें इसलिए हो रहीं हैं क्योंकि शुरुआत में तो सरकार के किसी अंग को इस बात की जानकारी ही नहीं थी कि उन्हें करना क्या है। उन्होंने कहा कि मैं ही पहला शख्स था जिसने जनवरी में इस बात की चेतावनी दी थी कि हालात बिगड़ने पर मेडिकल उपकरणों की कमी हो सकती है लेकिन मेरी बातों पर किसी ने भी ध्यान ही नहीं दिया। ब्राइट ने कहा कि इस बात को उच्च स्तरीय डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विस में भी उठाया लेकिन कोई तवज्जो नहीं मिली थी।
ब्राइट ने ये कहकर कमिटी के मेम्बर्स को चौंका दिया कि ट्रंप प्रशासन के पास महामारी के लिए कभी कोई प्लान नहीं था। उन्होंने कहा- मैंने चेतावनी दी थी कि कोरोना वायरस के असर को शुरुआत में ही कम कर सकते हैं और यही मौक़ा है लेकिन किसी ने नहीं सुनी। बिना किसी योजना के पूरा सरकारी अमला राहत कार्य में जुट गया और स्थितियां बदतर हो गयीं। ब्राइट ने कहा कि उन्होंने क्लोरोक्विन को लेकर एक लेख लिखा था जिसके बाद बायोमेडिकल अडवांस्ड रिसर्च एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी के निदेशक पद से हटा दिया गया।
राष्ट्रपति ट्रंप ने एंटी वायरल ड्रग्स हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्विन को कोरोना वायरस के संक्रमितों के लिए गेमचेंजर बताया था। ब्राइट ने कहा मुझे पद से इसलिए हटाया गया क्योंकि मैं कोरोना वायरस को लेकर कांग्रेस की ओेर से आवंटित पैसे का वैज्ञानिक इस्तेमाल पर ज़ोर दे रहा था। मैं नहीं चाहता था कि जिन ड्रग्स और वैक्सीन में कोई साइंटिफिक मेरिट नहीं है उन पर पैसे खर्च किए जाएं।  

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