सरकार कर रही है PFC और REC का मर्जर, दोनों कंपनियों के शेयर लुढ़क गए

Updated on 09-02-2026 01:27 PM
मुंबई: भारत सरकार की दो कंपनियां हैं पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) और आरईसी (REC)। सरकार इन दोनों कंपनियों को मिला कर एक करना चाहती है। सरकार की योजना के अनुसार आरईसी का विलय पीएफसी में हो जाएगा। पीएफसी के बोर्ड ने इस आशय के प्रस्ताव को पिछले सप्ताह पारित भी कर दिया। आज इन कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई।

शेयर में कितनी हुई गिरावट

पीएफसी के शेयरों में सोमवार को 2.40% की सुबह ही गिरावट देखी गई। बीते शुक्रवार को बीएसई में यह 419.20 रुपये पर बंद हुआ था। आज सुबह यह 423.65 रुपये पर खुला और ऊपर 423.65 रुपये तक गया। नीचे में यह 405.30 रुपये तक आया। सुबह 11 बजे यह 2.4 फीसदी या 10 रुपये से कुछ ज्यादा गिरकर 408 रुपये पर ट्रेड हो रहा था। आरईसी के शेयर 3.5% लुढ़ककर 357 रुपये पर पहुंच गए।

क्यों लुढ़के शेयर

इन दोनों कंपनियों के शेयर इसलिए लुढ़के, क्योंकि पीएफसी के बोर्ड ने आरईसी के साथ विलय को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। यह विलय केंद्र सरकार के उस प्रस्ताव के अनुरूप है जिसमें बिजली वित्त क्षेत्र की इन दो बड़ी सरकारी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) को पुनर्गठित करने की बात कही गई थी। दरअसल, पीएफसी पहले से ही आरईसी में 52.63% की हिस्सेदारी रखता है। यह हिस्सेदारी उसने सरकार से आरईसी के शेयर खरीदकर हासिल की थी। पीएफसी ने एक नियामक फाइलिंग में बताया कि उसके बोर्ड ने सरकार के इस प्रस्ताव पर गौर किया है। सरकार का मानना है कि इन दोनों कंपनियों के विलय से उनका आकार बढ़ेगा, कामकाज में सुधार होगा और बिजली क्षेत्र को मिलने वाले कर्ज में भी बढ़ोतरी होगी।

वित्त मंत्री ने की थी घोषणा

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बीते 1 फरवरी को पेश किए गए बजट भाषण में पीएफसी और आरईसी के पुनर्गठन का प्रस्ताव रखा था। इसका मकसद सरकारी NBFCs को और मजबूत बनाना था। इससे पहले, कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) ने भी इस सौदे को मंजूरी दे दी थी, जिसके तहत पीएफसी ने आरईसी में सरकार की हिस्सेदारी खरीदी थी। इसके बाद से पीएफसी, आरईसी की मूल कंपनी बन गई थी। हालांकि, इस प्रस्तावित विलय को अभी कई सरकारी एजेंसियों से मंजूरी मिलनी बाकी हैं। साथ ही इसके ढांचे पर भी विस्तार से काम होगा। अगर यह विलय हो जाता है, तो दोनों कंपनियां एक हो जाएंगी और उनका एक ही बैलेंस शीट (वित्तीय हिसाब-किताब) होगा।

क्या करती है कंपनी


पीएफसी और आरईसी दोनों ही बिजली क्षेत्र को वित्तीय सहायता देने में अहम भूमिका निभाते हैं। केंद्र सरकार के बिजली मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करने वाली पीएफसी बिजली उत्पादन, पारेषण (ट्रांसमिशन), वितरण और नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) सहित बिजली के पूरे चक्र को वित्तीय मदद देता है। वहीं, आरईसी की स्थापना मूल रूप से ग्रामीण विद्युतीकरण परियोजनाओं के वित्तपोषण करने के लिए की गई थी। इसने भारत में लगभग सभी घरों तक बिजली पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

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