गलवान संघर्ष के 7 दिन बाद चीन ने चोरी छिपे किया था न्यूक्लियर टेस्ट, किस तरह का था परीक्षण, क्यों रखा गया था गुप्त? पूरी कहानी

Updated on 07-02-2026 02:37 PM
बीजिंग/वॉशिंगटन: अमेरिका ने आरोप लगाते हुए कहा है कि जून 2020 में चीन ने गुप्त न्यूक्लियर टेस्ट किया था। खास बात ये है कि चीन ने ये गुप्त परमाणु परीक्षण 22 जून 2020 को किया था, जबकि भारत के साथ गलवान घाटी में उसका संघर्ष 15 जून को हुआ था। अमेरिकी सरकार का कहना है कि चीन ने गुप्त तरीके से कम से कम एक "यील्ड-प्रोड्यूसिंग न्यूक्लियर टेस्ट" किया है। जिसपर रोक लगाई गई है। आपको याद होगा डोनाल्ड ट्रंप ने चीन और रूस को आधार बनाकर कहा था कि अब अमेरिका भी परमाणु हथियारों का परीक्षण करेगा।

चीन पर नये परमाणु परीक्षण के आरोप उस वक्त लगे हैं जब अमेरिकी अधिकारी, रूस के साथ न्यू START समझौते को सफल बनाने के लिए एक नई न्यूक्लियर हथियार नियंत्रण संधि की मांग कर रहे हैं, जिसमें चीन को भी शामिल करने की कोशिश है। अमेरिका के हथियार नियंत्रण और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए विदेश उप सचिव थॉमस डिनानो ने स्विट्जरलैंड के जिनेवा में निरस्त्रीकरण सम्मेलन में एक भाषण के दौरान कहा, "आज, मैं यह बता सकता हूं कि अमेरिकी सरकार को पता है कि चीन ने न्यूक्लियर विस्फोटक परीक्षण किए हैं, जिसमें सैकड़ों टन की निर्धारित यील्ड वाले परीक्षणों की तैयारी भी शामिल है।"
चीन के परमाणु परीक्षण को लेकर US के आरोपों में क्या है?
थॉमस डिनानो ने आगे कहा कि "PLA ने न्यूक्लियर विस्फोटों को छिपाकर, अपने परमाणु परीक्षणों को छिपाने की कोशिश की क्योंकि उसे पता था कि ये परीक्षण, परीक्षण प्रतिबंध प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन करते हैं।" यानि अमेरिका का कहना है कि चीन ने परमाणु संधि का उल्लंघन किया है।
  • चीन ने कॉम्प्रिहेंसिव न्यूक्लियर-टेस्ट-बैन ट्रीटी (CTBT) पर दस्तखत कर रखे हैं।
  • अमेरिका और चीन ने यील्ड-प्रोड्यूसिंग न्यूक्लियर टेस्टिंग पर खुद से रोक लगा रखी है।
  • CTBT सब-क्रिटिकल टेस्टिंग पर रोक नहीं लगाता है, जिसमें पूरी तरह से न्यूक्लियर रिएक्शन शामिल नहीं होता है।
  • चीन का आखिरी माना हुआ क्रिटिकल-लेवल न्यूक्लियर टेस्ट 1996 में हुआ था। जबकि इस तरह का अमेरिका का आखिरी टेस्ट 1992 में किया गया था।
अमेरिकी अधिकारी डिनानो ने आगे आरोप लगाते हुए कहा कि "चीन ने अपनी गतिविधियों को दुनिया से छिपाने के लिए डीकपलिंग – भूकंपीय निगरानी की प्रभावशीलता को कम करने का एक तरीका – का इस्तेमाल किया है।" उन्होंने कहा कि "चीन ने 22 जून 2020 को ऐसा ही एक यील्ड-प्रोड्यूसिंग न्यूक्लियर टेस्ट किया था।"
आपको बता दें कि सैकड़ों भूकंपीय निगरानी स्टेशनों के एक ग्लोबल नेटवर्क के जरिए CTBT लगातार नजर रखता है कि कोई देश परमाणु परीक्षण कर रहा है या नहीं। उत्तर कोरिया अभी तक एक मात्र देश है, जिसने साल 2000 के बाद परमाणु परीक्षण किए हैं और अगर अमेरिका के आरोप सही हैं, तो चीन ऐसा करने वाला दूसरा देश है
yield-producing परमाणु परीक्षण क्या होता है?
इस तरह के परमाणु टेस्ट में ऐसे परमाणु धमाके होते हैं, जिससे ऊर्जा निकलती है। yield का मतलब होता है कि धमाके में कितनी विस्फोटक ऊर्जा निकली है। इसे आमतौर पर किलोटन (Kt) या मेगाटन(Mt) में मापा जाता है। यानि मान लीजिए कि अगर किसी टेस्ट का यील्ड 15 किलोटन है, तो इसका मतलब ये हुआ कि उस एक छोटे से बम में 15000 TNT के बराबर ताकत है।

इस तरह के न्यूक्लियर टेस्ट में परमाणु सामग्री का इस्तेमाल तो होता है, लेकिन इसे इस तरह से डिजाइन किया गया होता है कि कोई परमाणु विस्फोट ना हो, यानि इस तरह के टेस्ट में मशरूम जैसा आग का गोला नहीं बनता है। इसीलिए इसे 'ज़ीरो यील्ड' कहा जाता है। इस तरह के परीक्षण करने का मकसद यह जांचना होता है कि क्या बम, डिजाइन के मुताबिक काम कर रहा है। ये असल में नये तरह के परमाणु हथियार होते हैं, जो आकार में छोटे होते हैं, लेकिन क्षमता के मामले में पुराने परमाणु हथियारों से सैकड़ों गुना ज्यादा क्षमता वाले होते हैं।
चीन के परमाणु टेस्ट पर अमेरिका को क्या पता है?
  • अमेरिका ने चीन के इस परमाणु टेस्ट को लेकर कोई और जानकारी नहीं दी है। अमेरिका ने ये भी नहीं बताया है कि उन्हें इस परमाणु परीक्षण के बारे में कैसे और कब जानकारी मिली है।
  • अमेरिकी विदेश विभाग ने अप्रैल 2025 में पब्लिश अपनी सबसे हालिया रूटीन इंटरनेशनल आर्म्स कंट्रोल कम्प्लायंस रिपोर्ट में चीन में ऐसी किसी परमाणु टेस्टिंग का जिक्र नहीं किया।
  • जबकि अमेरिका ने उस दौरान ये बताया था कि रूस ने कई टेस्ट बैन ट्रीटीज के प्रति अपनी कमिटमेंट का उल्लंघन करते हुए सुपरक्रिटिकल न्यूक्लियर टेस्टिंग की है।
  • पेंटागन की चीनी मिलिट्री डेवलपमेंट पर कांग्रेस को दी गई सालाना रिपोर्ट, जो दिसंबर 2025 में पब्लिश की गई थी, उसमें भी चीनी न्यूक्लियर टेस्टिंग का कोई जिक्र नहीं है।
  • डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल CBS न्यूज के "60 मिनट्स" नाम के एक शो में इंटरव्यू के दौरान आरोप लगाया था कि चीन और रूस न्यूक्लियर टेस्ट कर रहे हैं।
  • 2019 में अमेरिकी विदेश विभाग की कंप्लायंस रिपोर्ट में चीन के लोप नूर न्यूक्लियर टेस्ट साइट पर किए जा रहे काम को लेकर चिंता जताई गई थी। यह रिपोर्ट खास तौर पर जून 2020 में पब्लिश हुई थी, उसी महीने जब अंडर सेक्रेटरी डिनानो के मुताबिक PLA ने यील्ड-प्रोड्यूसिंग टेस्ट किया था।
अमेरिकी रिपोर्ट में बताया गया है कि "चीन की लोप नूर टेस्ट साइट को साल भर चलाने की संभावित तैयारी, एक्सप्लोसिव कंटेनमेंट चैंबर्स का इस्तेमाल, लोप नूर में बड़े पैमाने पर खुदाई की गतिविधियां, और उसकी न्यूक्लियर टेस्टिंग गतिविधियों में पारदर्शिता की कमी, जिसमें कॉम्प्रिहेंसिव न्यूक्लियर टेस्ट-बैन ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन के लिए तैयारी आयोग द्वारा संचालित इंटरनेशनल डेटा सेंटर को अपने इंटरनेशनल मॉनिटरिंग सिस्टम (IMS) स्टेशनों से डेटा के फ्लो को बार-बार रोकना शामिल है। अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस 'जीरो यील्ड' स्टैंडर्ड का पालन करता है और चीन को लेकर इन देशों में चिंता है।

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