नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी लड़ाई से कच्चे तेल की कीमत लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। यह 2022 के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर है। इससे दुनिया भर में महंगाई के बेकाबू होने का खतरा पैदा हो गया है। भारत भी अपवाद नहीं है जो अपना 85% तेल आयात करता है। इससे रुपये पर भी दबाव बढ़ा है और यह हाल में पहली बार डॉलर के मुकाबले 95 के पार चला गया था। ऐसी स्थिति में सबकी नजर आज से शुरू हो रही आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) मीटिंग पर है। यह समिति रेपो रेट का निर्धारण करती है। रेपो रेट बढ़ने से हर तरह के लोन की किस्त बढ़ जाती है।
इस बीच अर्थशास्त्रियों का कहना है कि पश्चिम एशिया संकट की वजह से महंगाई बढ़ने की आशंका के चलते आरबीआई मुख्य नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रख सकता है। एक दर्जन से अधिक अर्थशास्त्रियों के बीच किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, जिंस कीमतों में अस्थिरता और मुद्रा के तेज उतार-चढ़ाव ने नीतिगत परिदृश्य को जटिल बना दिया है। ऐसे में वृद्धि दर, मुद्रास्फीति पर आरबीआई के अनुमान और नीतिगत रुख पर गहरी नजर रहेगी।
महंगाई पर विचार
ईरान युद्ध शुरू होने के बाद आरबीआई की यह पहली एमपीसी मीटिंग है। इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, ‘कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के इर्द-गिर्द अनिश्चितता को देखते हुए, आरबीआई द्वारा अप्रैल की नीति में यथास्थिति बनाए रखने और कोई भी अगला कदम उठाने से पहले महंगाई के आंकड़ों पर विचार करने की संभावना है।’
आरबीआई की एमपीसी की बैठक आज से शुरू हो रही है
8 अप्रैल को इसमें लिए गए फैसलों की जानकारी देंगे गवर्नर
ईरान युद्ध से कच्चे तेल की कीमत में काफी तेजी आई है
इससे देश में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है
साथ ही रुपये पर फिलहाल भारी दबाव दिख रहा है
एसबीआई के मुख्य अर्थशास्त्री सौम्य कांति घोष ने कहा कि दरों को स्थिर रखने की घोषणा करते समय आरबीआई अपनी टिप्पणी में काफी सावधानी बरतेगा। उन्होंने कहा, ‘भारत मौजूदा संकट से अछूता नहीं है। रुपया पहले ही 93 प्रति डॉलर के ऊपर बना हुआ है और कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर है, जिससे मुद्रास्फीति बढ़ी है।’ घोष ने यह भी कहा कि अनुमानित सुपर अल नीनो भी मुद्रास्फीति पर दबाव डालेगा।
कब से नहीं बदला रेपो रेट
क्रिसिल की प्रधान अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे ने कहा कि यदि महंगाई एमपीसी के लक्ष्य के करीब रहती है, तो मौद्रिक नीति में इस झटके को नजरअंदाज करके दरों को स्थिर रखा जा सकता है। केंद्रीय बैंक ने पिछले साल फरवरी से अब तक रेपो रेट में 1.25 प्रतिशत की कमी की है। हालांकि, बैंक ने अगस्त, अक्टूबर और फरवरी, 2026 की बैठक में दर को अपरिवर्तित रखा।
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