
गौरतलब है कि 50 एमपीएन से कम मात्रा वाला पानी पीने योग्य माना जाता है। 50 से 500 एमपीएन प्रति 100 मिलीलीटर का पानी ब्री ग्रेड का होता है और यह पीने योग्य नहीं होता है। मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रतिमाह नर्मदा के पानी की जांच की जाती है और इसकी शुद्धता के दावे किए जाते हैं।
मंडलेश्वर स्थित नर्मदा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट इस नर्मदा के पानी का फिल्टरेशन कर उसकी उसमें मौजूद बैक्टीरिया को नष्ट कर इंदौर तक इस पानी की आपूर्ति की जाती है। मंडलेश्वर में ट्रीटमेंट प्लांट तैयार किया जा रहा है।
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 35 लोगों की मौत के बाद भी नगर निगम शहरवासियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं करवा पा रहा है। नगर निगम की मूसाखेड़ी स्थित लैब में विगत दो माह में हुई पानी की जांच में ही यह सच्चाई सामने आ गई है। इस लैब में जांच के लिए पहुंच रहे नर्मदा पानी के सैंपल फेल हुए है।
ऐसे में नगर निगम द्वारा शहरवासियों को उपलब्ध करवाए जा रहे पेयजल की गुणवत्ता पर अब भी सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर में नगर निगम द्वारा वितरित किए जाने वाले नर्मदा पेयजल की दिसंबर व जनवरी माह के 50 दिनों में शहर के अलग-अलग कॉलोनियों से पहुंचे 280 में से 206 सैंपल फेल हुए। जनवरी माह में 20 दिनों में ही 167 पानी के सैंपल फेल होने की जानकारी आई। नगर निगम द्वारा विधानसभा में यह जानकारी प्रस्तुत की गई है।
नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक पिछले दो वर्षो में शहर में दूषित पानी की शिकायतें भी बढ़ी है और इसके साथ जांच में दूषित पानी के सैंपल फेल होने के मामले भी सामने आए है।