
संसद में सरकार का जवाब
राज्यसभा सदस्य रणदीप सिंह सुरजेवाला के सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि 'औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम 1940' की धारा 32 ख के तहत यदि मिलावटी दवाओं से मौत होती है, तो न्यायालय दोषी पर जुर्माना लगाएगा और उस राशि से पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश देगा। यानी केंद्र ने अपने स्तर पर किसी भी विशेष 'मुआवजा कोष' की बात नहीं की।
एमपी सरकार की मदद का संसद में जिक्र नहीं
अक्टूबर 2025 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रत्येक पीड़ित परिवार को ₹4 लाख की सहायता राशि देने का ऐलान किया था। छिंदवाड़ा जिला प्रशासन के मुताबिक यह राशि कई परिवारों के खातों में भेज भी दी गई थी। संसद में सरकार ने राज्य सरकार द्वारा दिए गए इस ₹4 लाख की आर्थिक मदद का कोई जिक्र नहीं किया।
राज्य सरकार ने जो ₹4 लाख दिए, वह 'तात्कालिक आर्थिक सहायता' (Ex-gratia) थी। जबकि संसद में जिस मुआवजे की बात हो रही है, वह 'कानूनी मुआवजा' (Legal Compensation) है, जो लंबी अदालती प्रक्रिया के बाद दोषी कंपनी की जेब से निकलेगा।
तकनीकी पेंच: मुआवजे के लिए कोर्ट का इंतजार