चीन की मिसाइलों में फ्यूल की जगह पानी भर दिया:रिपोर्ट में दावा- कई मिसाइलें खुल भी नहीं पाईं, जिनपिंग ने अफसरों को निकाला

Updated on 02-02-2026 05:31 PM
बीजिंग, चीन की रॉकेट (मिसाइल) फोर्स का बड़ा घोटाला सामने आया है। ब्रिटिश अखबार टेलीग्राफ की खबर के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की 2024 की रिपोर्ट में बताया गया है कि पश्चिमी चीन में कुछ मिसाइलों में फ्यूल की जगह पानी भरा हुआ था।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि जिन जगहों से इन मिसाइलों को जमीन के नीचे बने जिन साइलो से लॉन्च किया जाना था, वे भी ठीक नहीं थे। ये साइलो इतने भारी और खराब तरीके से बनाए गए थे कि उनके ढक्कन खुल ही नहीं पा रहे थे।

इन खुलासों के बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की रॉकेट फोर्स के पूरी टॉप लीडरशिप को हटा दिया।

सेना में भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाई

पिछले महीने PLA में भ्रष्टाचार के मामले में सबसे बड़ी कार्रवाई की गई। चीन की सेना की सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के वाइस चेयरमैन झांग यूक्सिया को उनके पद से हटा दिया गया।

झांग PLA के सबसे सीनियर अफसर थे और शी जिनपिंग को बचपन से जानते थे। इसके बावजूद उन्हें हटाया जाना दिखाता है कि इस कार्रवाई में किसी को भी बख्शा नहीं गया। CMC के अब तक 5 अफसर हटाए जा चुके हैं।

जानकारों का कहना है कि यह सिर्फ भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम नहीं है। शी जिनपिंग चाहते हैं कि सेना पूरी तरह उनके नियंत्रण में रहे और एक ऐसी आधुनिक फौज बने, जो जरूरत पड़ने पर ताइवान पर हमला कर सके।

उनका लक्ष्य है कि 2027 तक सेना पूरी तरह तैयार हो और 2049 तक चीन की फौज अमेरिका से भी ज्यादा ताकतवर बन जाए।

चीन मामलों के पूर्व CIA एक्सपर्ट जोनाथन जिन के मुताबिक, इस पूरे अभियान का पैमाना बेहद बड़ा है। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार एक तरफ सेना को कमजोर कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ शी जिनपिंग इसी मुद्दे के जरिए सेना को अपने राजनीतिक और रणनीतिक लक्ष्यों के मुताबिक ढाल रहे हैं।

जनरल झांग पर क्या आरोप लगाए गए

चीनी सेना के अखबार PLA डेली के मुताबिक, जनरल झांग पर आरोप है कि उन्होंने सेना में उस व्यवस्था का पालन नहीं किया, जिसमें सभी फैसलों में सीधे राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बात मानी जाती है। अखबार ने कहा कि झांग ने इस सिस्टम को गंभीर रूप से नजरअंदाज किया।

हालांकि, जनरल झांग पर लगे आरोपों की पूरी जानकारी चीन ने सार्वजनिक नहीं की है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि उन्होंने चीन के परमाणु हथियारों से जुड़ी जानकारियां अमेरिकी एजेंसियों तक पहुंचाईं। यह भी कहा गया है कि उन्होंने ताइवान पर हमले की तय समय-सीमा से असहमति जताई थी।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि जनरल झांग सेना में एक व्यक्ति के आदेेश की बजाय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति निष्ठा पर जोर दे रहे थे। यही सोच शी जिनपिंग को पसंद नहीं आई और यही उनके खिलाफ कार्रवाई की एक बड़ी वजह बनी।

क्या चीनी सेना कमजोर पड़ रही है?

इन कार्रवाइयों के बाद चीन की सेना को चलाने वाली सबसे बड़ी संस्था, सेंट्रल मिलिट्री कमीशन में अब सिर्फ दो ही लोग बचे हैं।

एक खुद राष्ट्रपति शी जिनपिंग और दूसरे भ्रष्टाचार पर नजर रखने वाले अधिकारी झांग शेनमिन। मीडिया रिपोर्ट्स में यह सवाल उठे कि इतनी बड़ी सेना से अनुभवी अफसर हटाए जा रहे हैं और इससे उसकी ताकत घट सकती है।

लेकिन चीन मामलों के जानकार जोनाथन जिन इससे सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि इसे सेना की कमजोरी नहीं समझना चाहिए।

उनके मुताबिक शी जिनपिंग सेना से ध्यान नहीं हटा रहे, बल्कि वे पूरी तरह इसी पर फोकस किए हुए हैं और चाहते हैं कि हर काम उनकी योजना के मुताबिक ही हो।

ताइवान पर नजर, लेकिन जल्दबाजी नहीं

एक्सपर्ट्स का मानना है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ताइवान को सीधे युद्ध के बजाय राजनीति के रास्ते अपने साथ जोड़ना ज्यादा पसंद करेंगे।

वजह यह है कि ताइवान पर हमला करने की कीमत बहुत बड़ी होगी। ताइवान में 2028 में चुनाव होने हैं और फिलहाल वहां की राजनीति कुछ हद तक चीन के पक्ष में जाती दिख रही है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि शी जिनपिंग सेना को ढील दे रहे हैं। वे चाहते हैं कि सेना हर हाल में तैयार रहे।

इसी वजह से नवंबर में उन्होंने ताइवान से जुड़े इलाके की जिम्मेदारी संभालने वाले ईस्टर्न थिएटर के 7 जनरलों समेत 9 वरिष्ठ अधिकारियों को हटा दिया। इसके अगले ही महीने चीन ने ताइवान के आसपास अब तक के सबसे बड़े सैन्य अभ्यास कराए।

जिनपिंग ने सेना के भीतर सिस्टम में बदलाव किए

चीन का सर्वोच्च नेता रहे डेंग जियाओपिंग के समय में (1978-89) सेना को कारोबार करने की छूट दी गई थी। इससे सेना के अंदर पैसा कमाने का चलन बढ़ा और भ्रष्टाचार गहराता चला गया। जब शी जिनपिंग सत्ता में आए तो उन्होंने 2014 से इस व्यवस्था को खत्म करना शुरू किया।

अगले ही साल, 2015 में शी जिनपिंग ने सेना के 3 लाख जवान कम किए। साथ ही कमांड सिस्टम में बड़े बदलाव किए, ताकि अफसरों के गुट न बनें और फैसले जल्दी हों।

इसके साथ ही चीन ने सेना पर खर्च भी तेजी से बढ़ाया। आज चीन के पास दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना, दूसरी सबसे बड़ी वायुसेना और तेजी से बढ़ता मिसाइल जखीरा है।

चीन का आधिकारिक रक्षा बजट करीब 250 अरब डॉलर बताया जाता है, हालांकि जानकार मानते हैं कि असली खर्च इससे कहीं ज्यादा है।



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