
भोपाल। चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए एम्स भोपाल के वैज्ञानिकों ने मानव शरीर रचना विज्ञान में नई कड़ी जोड़ी है।
संस्थान के विशेषज्ञों ने नाक के पीछे और गले के ऊपरी हिस्से, यानी नासाग्रसनी (नेजोफैरिंक्स) क्षेत्र में स्थित एक विशेष ग्रंथि की पहचान की है। इतना ही नहीं, इस ग्रंथि से संबंधित एक अज्ञात निकासी नलिका (डक्ट) को भी पहली बार वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित किया गया है।
यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित पत्रिका Journal of Anatomy में विशेषज्ञों की गहन समीक्षा के बाद प्रकाशित हुआ है, जिससे इसकी वैज्ञानिक विश्वसनीयता और महत्व और अधिक बढ़ गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह खोज सिर और गर्दन की सर्जरी को अधिक सुरक्षित और सटीक बनाने में मदद करेगी। कैंसर उपचार और रेडियोथेरेपी की योजना बनाते समय महत्वपूर्ण ऊतकों की पहचान अधिक स्पष्टता से की जा सकेगी। मेडिकल इमेजिंग में भी रोगों की पहचान की सटीकता बढ़ेगी।