
इस तरह किसानों को सालाना कुल 12 हजार रुपए दिए जाते हैं। लेकिन संसद में पेश की गई एक रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में डेढ़ लाख से अधिक किसान इस योजना से बाहर हो गए हैं।
राज्यसभा में सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन सालों में राज्य के 1.66 लाख से अधिक किसान इस योजना की सूची से बाहर हो गए हैं। इसका सीधा असर राज्य को मिलने वाली आर्थिक सहायता पर भी पड़ा है।
इधर, प्रधानमंत्री किसान सम्मन निधि से 160000 किसानों को बाहर किए जाने पर कांग्रेस विधायक सुजीत सिंह चौधरी ने कहा धीरे-धीरे इस योजना से किसानों को बाहर किया जाएगा। अब तक 166000 किसान बाहर किए जा चुके हैं, जो राशि मिलती है वह भी ऊंट के मुंह में जीरा है। हालांकि कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना बोले- योजना से कोई बाहर नहीं हुआ है।
मध्य प्रदेश: 83.48 लाख से घटकर 81.81 लाख हुए हितग्राही
संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश में लाभार्थियों की संख्या इस प्रकार घटी है:
ई-केवाईसी लंबित: 74 हजार किसानों की किश्तें अटकीं
लाभार्थियों की संख्या घटने का एक बड़ा कारण तकनीकी अनिवार्यताएं हैं। आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश के 74,271 किसानों की किश्तें केवल इसलिए रुकी हुई हैं क्योंकि उनका ई-केवाईसी सत्यापन अधूरा है। जैसे ही ये किसान अपनी प्रक्रिया पूरी करेंगे, उनका लाभ फिर से शुरू हो सकता है।
बजट में ₹93 करोड़ की कमी
लाभार्थियों की संख्या घटने से राज्य को मिलने वाली राशि में भी कमी आई है।