दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क का एक बार फिर दावा है कि भविष्य में रिटायरमेंट के लिए पैसे बचाना बेमानी हो जाएगा। उनके मुताबिक जरूरत की हर चीज और सुविधा इतनी ज्यादा मात्रा में बन जाएगी कि जमा पूंजी का कोई महत्व नहीं रह जाएगा।

मस्क पिछले कुछ सालों से लगातार कह रहे हैं कि AI और रोबोटिक्स से चीजें बहुत तेजी से सस्ती बनेंगी। इसके बाद काम करने, सैलरी पाने और पैसे बचाने का पारंपरिक तरीका खत्म हो जाएगा। मस्क ने 'X' पर एक यूजर के पोस्ट का जवाब देते हुए यह बात कही।

विव ने लिखा था कि अपने हर उल्टे-सीधे खर्चे को मैं बस यही कहकर सही मान लेता हूं कि आगे चलकर तो सब भरपूर होने वाला है। अब ऐसा भी नहीं कि पूरी तरह से लापरवाह हो जाओ, पर हां कुछ सालों में इनमें से ज्यादातर चीजों से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला।

रोबोटिक्स और स्पेस ट्रैवल से बनेगी मल्टी-प्लेनेटरी इकोनॉमी

मस्क ने हाल ही में अपने विजन को विस्तार से समझाते हुए कहा था कि रोबोटिक्स और स्पेस ट्रैवल में होने वाले बड़े सुधार एक 'मल्टी-प्लेनेटरी इकोनॉमी' को जन्म देंगे।

उन्होंने कहा कि इस मुकाम पर पहुंचने के बाद पारंपरिक करेंसी का कोई महत्व नहीं रहेगा। जब उत्पादन की कोई सीमा नहीं होगी, तो आर्थिक लेनदेन का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा।

'जो चाहो वो मिलेगा, कोई चीज दुर्लभ नहीं होगी'

मस्क का मानना है कि AI, एनर्जी सेक्टर और रोबोटिक्स मिलकर प्रोडक्शन कैपेसिटी को कई गुना बढ़ा देंगे। इसका नतीजा यह होगा कि दुनिया में संसाधनों की कोई कमी नहीं होगी।

इसे एक उदाहरण से समझिएं…

मान लीजिए आज आपको नई कार खरीदनी है, घर बनाना है या अस्पताल में इलाज कराना है। इन सब कामों में इंसानों की मेहनत लगती है। इंजीनियरों और डॉक्टरों की फीस होती है और सामान बनाने की लागत भी ज्यादा आती है। यही वजह है कि ये चीजें महंगी हैं।

अब सोचिए कि भविष्य में कार बनाने से लेकर खेती करने और इलाज तक का सारा काम AI और रोबोट्स कर रहे हैं। रोबोट्स न कभी थकते हैं और न ही सैलरी मांगते हैं। जब किसी भी सामान को बनाने का खर्चा लगभग शून्य हो जाएगा तो सब बहुत सस्ता मिलने लगेगा।

बिल गेट्स बोले- अगले 20 साल उथल-पुथल भरे रहेंगे

बिल गेट्स के मुताबिक AI से भविष्य में सब आसान होगा, लेकिन अगले 20 सालों का बदलाव इंसानी इतिहास का सबसे तनावपूर्ण समय साबित होगा।

  • दफ्तरों से लेकर फैक्ट्रियों तक नौकरियां जाएंगी: टेलीकॉलिंग, एकाउंटिंग और सपोर्ट का काम AI छीनेगा, जबकि खेती, मकान निर्माण और सर्जरी का काम रोबोट्स संभाल लेंगे।

  • सामान बनाने में इंसानी श्रम की जरूरत खत्म: अगर AI की रफ्तार पर ब्रेक नहीं लगा, तो अर्थव्यवस्था में सामान बनाने के लिए इंसानों की मेहनत की कोई जरूरत ही नहीं बचेगी।

  • इंसान के जीवन का मकसद प्रभावित होगा: काम सिर्फ पैसे कमाने का जरिया नहीं, बल्कि इंसान को एक मकसद देता है। AI के आने से इंसानी जीवन का यह संतुलन बिगड़ जाएगा।

  • बच्चों की देखभाल इंसानों के पास रहेगी: AI खाना बनाने, खेल और बच्चों की देखभाल करे, फिर भी ये काम इंसानों के लिए रिजर्व रखे जा सकते हैं ताकि जिंदगी का मजा बचा रहे।

  • काम के घंटे कम करने का सुझाव: बेरोजगारी के संकट से बचने के लिए बिल गेट्स, जेफ बेजोस ने हफ्ते में काम के दिन घटाने और जल्दी रिटायरमेंट देने की सलाह दी है।

मस्क के दावे पर एक्सपर्ट्स की चेतावनी

  • मस्क गलत निकले तो सड़क पर आ जाएंगे: सर्टिफाइड पब्लिक अकाउंटेंट स्टेसी जॉनसन ने कहा कि अगर मस्क सही निकले और आपने पैसे बचा लिए, तो आपके पास थोड़ा एक्स्ट्रा पैसा होगा जो कोई नुकसान नहीं है। लेकिन मस्क गलत निकले और आपने पैसे नहीं बचाए, तो बुढ़ापे में बिना पैसों के सड़क पर आ जाएंगे।

  • भविष्य अनिश्चित और असमान रहेगा: व्हार्टन स्कूल की प्रोफेसर ओलिविया मिचेल के अनुसार AI से लागत भले कम हो जाए, लेकिन आर्थिक तरक्की का फायदा सबको बराबर नहीं मिलेगा।

  • सिर्फ बातों से बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं होंगी: वेल्थ मैनेजर क्रिस्टिन पुघ का तर्क है कि पुरानी तकनीकों से भी लोगों की उत्पादकता तो बढ़ी, लेकिन काम कम नहीं हुआ। मस्क जैसे दिग्गजों को पहले यह बताना चाहिए कि वे इस पूरी व्यवस्था को जमीन पर कैसे लागू करेंगे।

  • सरकारें मुनाफा बांटेंगी या नहीं, तय नहीं: लंदन बिजनेस स्कूल की प्रोफेसर एकातेरिना अब्रामोवा का मानना है कि यूनिवर्सल इनकम AI से ज्यादा सरकारों की नीतियों और राजनीतिक फैसलों पर निर्भर करेगी।

  • इतिहास से सबक सीखें, बचत न रोकें: यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के जेम्स रैनसम का तर्क है कि इतिहास में नई तकनीकों ने कभी अमीर-गरीब का अंतर खत्म नहीं किया। 1950 में परमाणु युद्ध के डर से जिन लोगों ने पेंशन फंड जमा नहीं किया, वे बाद में पछताए।